“जैन हिल्स: जलगांव की पहचान और भविष्य की नई उम्मीद”…

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    बड़े भाऊ…
    (आदरणीय भवरलालजी जैन)
    जलगांव आपका शुक्रगुजार है, आपके बनाये “जैन हिल्स” के कारण हो सकता है जलगांव में लड़कियां “ब्याहना” पसंद करे ।
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क़िस्सा है पिछले सप्ताह जलगांव में “जीतो” संघटना की एक देश व्यापी कांफ्रेंस हुई । सभीके अथक प्रयास से वह सफल भी रही ।

मुझे लगता है सफलता के चार मुख्य घटक रहे .. एक जीतो संगठन की वर्क सिस्टम्स, उसकी सुनियोजित कार्य प्रणाली, दूसरी जीतो युवा टीम की मेहनत , तीसरा जलगांव के उदार मन वाले प्रायोजक और चौथा सबसे महत्वपूर्ण घटक था जैन हिल्स के ग्रीन परिसर और जैन ग्रुप की सपोर्ट सिस्टम का।

मैं आज बात करूँगा चौथे घटक पर । आयोजन को यादगार बनाया जैन हिल्स के अलग अलग पहलू ने । वहाँ बसा मनभावन निसर्ग हर किसी को मोहित कर रहा था। वहाँ का लेक से सटा “श्रद्धा एम्पीथिएटर, रहने के लिए बने आश्रम- गुरुकुल, अनमोल पेड़ो से सजी भाऊँची सृष्टि, गांधी तीर्थ, कांफ्रेंस के लिए अलग अलग हॉल्स, विशाल डोम्स सभी आयोजनों में जान भर रहे थे। यकीनन आयोजकों का काम आधा कर रहे थे ।

ऊपर से जैंस की सपोर्ट सिस्टम भी साथ थी । इवेंट के हर लोकेशन का डेकोरम होगा या छोटी छोटी अरेंजमेंट होगी जिसे वहीं की जैन की तत्पर टिम अनजाने में पूरी कर देती थी ।

छोटासा किस्सा शेयर करता हूँ, हम कुछ मेंबर्स जैन फ़ूड पार्क देखने गए थे । वहीं से किसने “भाऊंची सृष्टि” देखने की इच्छा जाहिर की, जो की शेड्यूल में नहीं थी। फिरभी वहाँ के pro ने हमें वहाँ भेजने की व्यवस्था तो की ही पर साथमें गाड़ी में पानी की बॉटलों का एक पूरा कैरेट रखना नहीं भूला । ड्राइवर को बोल रहा था “वहाँ धूप लगेगी तो पानी सबको पानी पिला देना।” यह थी jains की कैरिंग सपोर्ट सिस्टम।

मुझे याद है…जैन हिल्स पर हुई दो नेशनल “महाकॉट” कांफ्रेंस भी, जिसके मैनेजमेंट में हमारा काफ़ी योगदान था। वो कांफ्रेंस भी अपार सफल हुई , डेलीगेट खुश होकर गए । इतनाही क्यों हमारे घर की एक, दो नहीं तीन तीन शादियां वहीं हुई और तीनों बार बाहर से आए परिवार और उनके एक्सटेंडेड परिवार शादी की खुशनुमा यादें लेकर गए।

भाऊ, जैन हिल्स को आपने बनाया और उसकी वाह वाह हमें, जलगांव वालों को मिलती रही है। ।

इस इवेंट के समापन के बाद हमारे मालेगांव के मित्र सम्यकजी को जलगांव के प्रतिष्ठित परिवार के आदरणीय बाबूजी को मिलना था तो मैं भी साथ हो लिया , बहुत दिनों से मैं भी उनसे मिलना चाहता था। घर गए, खाने की मनुहार हुई, भोजन घर पर कह रखा था तो मना करना संभव हुआ, फिर भी गर्म गर्म गाजर का हलवा तो खाना ही पड़ा । इधर उधर की बातें चली। सम्यकजी को भी बातें करने का शौक़ है । अंत में बाबूजी ने सम्यकजी से कहा “पोते के लिए कोई अच्छी लड़की ढूँढने ने को तुम्हारी मम्मी को बताना (जो जीतो मैट्रिमोनी की कन्वेयर है), कोई डिमांड नहीं है, लड़की पढ़ी लिखी चाहिए , अच्छा परिवार चाहिए और और लड़की जलगांव में रहने के लिए राजी होनी चाहिए।

सुनकर मैं सोचने लग गया।

आज का सच है, बड़े शहर से लड़कियाँ जलगाँव में स्थायी होना कम ही पसंद करती है । वक़्त लगेगा जब शहर से लड़कियाँ दूसरे बड़े शहर के बजाय छोटे गाँव में आना पसंद करेंगी । पर वो दिन ज़रूर आयेगा।

भाऊ, उस वक़्त मुझे आपने बनाये जैन हिल्स का महत्व समझ में आया।कोई भी व्यक्ति, किसी भी कारण क्यों ना हो, जब वो जैन हिल्स आता है, तब वह आयोजन की, आयोजकों की, जैन हिल्स की सुंदरता की , हरियाली की और साथ ही जलगांव की यादें साथ में लेकर जाता है । भविष्य में जब भी वो जलगांव का नाम सुनेगा या कहीं किसी बायोडाटा में देखेगा तो हो सकता है वो जलगांव के गांव इस शब्द को नज़र अंदाज़ कर सुंदर जलगांव से जुड़ना शायद पसंद करेगा।

और इसीलिए भाऊ मुझे लगता है आपके बसाए, सजाएं जैन हिल्स के कारण जलगांव में कुछ पैरेंट्स और समझदार लड़कियाँ अपना संसार
बसाना पसंद करेगी ।

हम जलगांव वासियों की तरफ़ से आपको तहेदिल से धन्यवाद।
मुझे यकीन है “भाईसाब” के आनंद की बातें आप तक जरूर पहुँचती होगी।
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है ना लाइफ इस ब्यूटीफुल !
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आनंद मल्हारा,
१९/२/२०२५, जलगांव

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