यूरोप ट्रिप: सपने, हादसे और अनिश्चितताओं का सफर…

यूरोप ट्रिप: सपने, हादसे और अनिश्चितताओं का सफर…

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चलो जर्मनी के साथ
लंदन भी घूम ही आते है।
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बात थोड़ी पुरानी हो गई है, काफ़ी दिनों से लिखने का मूड ही नहीं बन रहा था, और फ़ुरसत भी नहीं मिल रही थी। कभी वक़्त भी मिलता तो शाम को टीवी में घुस जाता था। क्या पता उम्र के साथ आलस भी मुझ पर हावी होता दिख रहा था।

क़िस्सा मेरा नहीं, हमारे यूरोप और यूके की पहली ट्रिप का है। जर्मनी में हर पाँच साल में एक बार प्रिंटिंग इंडस्ट्री का एक सबसे बड़ा एक्ज़ीबिशन “drupa”लगा करता है । मुझे शौक़ है तो मैं जाया करता था ताकि नई टेक्नोलॉजी मालूम पड़े, इंडस्ट्री में नया क्या आने वाला है समझ में आये।

इस जून २४ में जब हम दोनों जर्मनी और यूके गये थे उसके क़िस्से लिखने से पहले थोड़ा फ़्लैश बैक में जाते हैं। २०१९ में तीसरी बार जर्मनी में एक्ज़ीबिशन और साथ में यूरोप घूमने का प्लान किया था कारण था..पहली बार एक्ज़ीबिशन में बीबी साथ आ रही थी। सब कुछ तय हो जाता है, पूरा पेमेंट ट्रैवल कंपनी “कॉक्स n किंग्स” को दे दिया जाता है।

पर एक हादसा हो जाता है, एक्ज़ीबिशन के ५-६ दिन पहले ही “माँ “ का दुःखद निधन हो जाता है। तुरंत टूर को कैंसिल करने का निर्णय लिया जाता है। टूर ऑपरेटर को फ़ोन करते हैं, उन्हें कारण बताते है, उन्होंने कहा “कोई बात नहीं, हम आपकी टूर कैंसिल कर देंगे, टेंशन मत लो।” हम भी निश्चिंत हो जाते हैं।

माँ के अंत्य संस्कार और सभी कार्य उठवाना, बैठक आदि संपन्न होने के बाद हमने फिर सोचा…क्यों न हम एक्सीबीशन देखने चले चले कारण हमारा ग्रुप दो दिन बाद फ्लाई करने वाला था। हमने टूर ऑपरेटर से बात की, तो उन्होंने कहा “हमने आपके टिकट कैंसिल कर दिये हैं। अब संभव नहीं है।” हमें लगा चलो ठीक है, टिकट वग़ैरे कैंसिल हो गये है , रिफ़ंड भी अच्छा मिल जाएगा। उन्होंने भी हमें कहा था “जो भी बेस्ट होगा हम करेंगे,” पर क्लियर कुछ नहीं था। मैंने भी उन्हें गुड फेथ में मेल में लिख दिया “आपको जो भी बेस्ट संभव है उसे सेटल करें..वह मुझे स्वीकार रहेगा।

टूर वापस आ जाती है, हम ट्रैवल एजेंसी से रिफ़ंड की बात करते हैं। कोक्स न किंग्स को फ़ोन, मेसेज, मेल आदि भेजे जाते हैं, उनके रिप्लाई भी आते रहते हैं पर वे बात को टालते रहते है, बोलते है , देख रहे है, करते हैं , अंत में वहाँ का शैलेश एग्जीक्यूटिव कहता है “कंपनी कहती है आपने लास्ट मोमेंट पर टूर कैंसिल की है तो कुछ भी रिफ़ंड संभव नहीं है फिर भी मैं मेरे पर्सनल अकाउंट से आपको कुछ अमाउंट दे दूँगा।”

मैं डिस्टर्ब हो जाता हूँ, शायद ३-४ लाख़ का मामला था। पहचान के सॉलिसिटर दोस्त हसितभाई से बात करता हूँ, वो कहता है “बात तो तुम्हारी सही है, उन्होंने रिफ़ंड देना चाहिए, पर आनंद तुमने उन्हें राइटिंग में दिया है जो भी वो करेंगे तुम्हें मंज़ूर होगा, तो अब हम कैसे फाइट करेंगे? “

कुछ दिनों बाद मेरी एक ग्राहक मंच के जज से पहचान होती है , उसे क़िस्सा सुनाता हूँ तो वे कहती है आप लड़ो, आपकी केस में दम है। वकील पैसे लेता है , केस शुरू होती है , चलती है और कुछ फ़ैसला होने के पहले ही “कॉक्स n किंग्स” दिवालिया घोषित हो जाती है। मैं भी सोचता हुँ जाने दो, शायद उनकी हालात बुरे थे या उनका वक़्त बुरा था जिसकी वजह से वे रिफ़ंड दे नहीं पा रहे होंगे।

एक बात बताना भूल गया जब दोस्त हसित ने मेरे सभी काग़ज़ात देखें थे तब उसने ट्रैवल इन्शुरन्स के पेपर को ध्यान से पढ़ा और एक क्लाज़ बताया कि यदि ट्रैवल के पूर्व कोई फ़ैमिली मेम्बर याने माँ, पिता, पति, बच्चे का देहांत हो जाता है और टूर कैंसल होता है तो कुछ पैसा इन्शुरन्स कंपनी रिफ़ंड करती है । वो पैसे हमें मिले थे। कितने मिले थे याद नहीं पर मिले थे।

क्रमशः२
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है ना लाइफ इस beautiful but फुल ऑफ़ uncertainty!

आनंद मल्हारा
१/११/२४, जलगाँव

नोट ~ तारीख सही है।

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