रमेश भाई क़े यहाँ आज dawat थी।
30-35 से कम आइटम नहीं होंगे।
नमकीन सेक्शन में एक बाउल में भजिये दीखे, ख़ास बात ये थी कि उसे चम्मच से देने एक वेटर खड़ा था।
जनरली भजिये को इतना रिस्पेक्ट पहले नही देखा था।
मैं लेने खड़ा हुआ .. तो वेटर ने चिमटे से केवल दो पीस दीये पकौडे के जो साइज में भी छुटकू थे…
मैंने और मांगे.. उसने दिये।
फिर मैं अपने दोस्त के पास चला गया और उसे ट्राय किया .. जो टेस्ट हुम् पकोड़े में या भजिये में एक्सपेक्ट करते वो नहीँ आया तो फिरसे एक खाकर देखा… क्लियर नही हो रहा था किसके बने यह पकोड़े । आधा खाया और अंदर देखा क्या है उसमें… .तब समजा वो पकोड़े काजू…keshew के थे। जहाँ हमारी जबान को प्याज, आलू, गिलकी, मिर्ची , दाल, कॉर्न आदि के पकोड़े का टेस्ट लगा है.. अब उसे डॉयफ्रूइट्स के नए टेस्ट की आदत डालनी पड़ेगी।
तब पूरा पिक्चर क्लियर हुआ.. क्यों पकोड़े परोसने स्पेशल वेटर था.. क्यों वो केवल दो दो पीस दे रहा था।
बहुत अचरज हुआ … शेफ की क्रिएटिविटी पर.. पकोड़े की किस्मत पर और काजू के भाग्य पर .. कहते हैं ना भाग्य / दिन बदलते देर नहीँ लगती।


