*यह दीपावली बनी सबसे लम्बी*
*गत 32 सालों वाली…*
पिछले 32 सालों में दीपावली की 5 दिन की लम्बी छुट्टी पहली बार एन्जॉय की। एन्जॉय का भी कारण था… इन छुट्टियों को मेरे साथ
मेरे 150 सहयोगी कर्मचारी भी अपने-अपने घर एन्जॉय जो
कर रहे थे…
मुझे याद है… पहले हर दिवाली में कर्मचारियों को अल्टरनेट छुट्टियाँ देनी पडती थी। उन्हें समझाना पडता था.. भाई सिझन है.. अपने ग्राहकों को सेवा देने लिए उपलब्ध रहना जरुरी है। वह सही भी था.. तब काम का रश भी होता था। एक तो हमारे यहाँ दिवाली ग्रीटिंग्ज का एक्स्ट्रा काम चलता था, जो दिवाली में ही एक्स्ट्रा काम करने पूरा करना होता था। उससे एक्स्ट्रा मुनाफा भी होता था। वहीं से हमारे यहाँ बोनस की प्रथा शुरु हुई। अब ग्रीटिंग्ज का काम न के बराबर हो गया है लेकिन बोनस की प्रथा रोते धोते चल रही है।
इस वर्ष छुट्टियाँ इसलिए भी दे पाये कि सचमुच दिवाली के बाद ज्यादा अर्जंट काम नहीं था। फिक्स छुट्टियाँ तो कर्मचारियों को वैसे भी देनी ही थी। सब मिलाकर इस दिवाली में कर्मचारी भी खुश और उनके घरवाले भी खुश और मालक भी खुश।
विशेष बात यह थी कि …इन पाँच दिनों में ग्राहको के इक्का दुक्काही फोन आए। शायद वे भी छुट्टी मना रहे होंगे या फीर खर्चे के मूड में नहीं होंगे। हमारे पास आना याने कमाने से पहले खर्चा करना होता है।
अरे हाँ… छुट्टियों में घुमते वक्त नासिक शहर में फोर्ड की गाडी और धुलिया के करीब फोक्स वेगन की हमारी गाडियाँ खराब हुई। दोनों के सर्वीस सेंटर बंद पाए गए। तब मजबुरन गाडी को भी आराम करने उसी शहर छुट्टी देनी पडी।
इस दिवाली ज्यादा तर लोगो ने लम्बी छुट्टियाँ मनायी। क्या कारण होगा? बहुत कमा लिया अब आराम करते हैं… या जैसे गुजरात में सब लोग छुट्टियाँ मनाते हैं। या हमारे यहाँ के काम की कमी, सुस्ताया हुआ व्यवसाय, या फीर बारीश की कमी… इन कारणों से मिली जबरदस्ती की छुट्टियाँ..? मालूम नहीं।
और हाँ… हमारे संवेदनशील, फॉरेन एज्युकेटेड दामाद ने अपना दर्द शेयर किया.. जो स्वयं प्रॉपर्टी व्यवसाय में कार्यरत है.. “इस सिजन जामनेर परिसर में प्रॉपर्टी में तेजी रही.. तेजी है.. पर साथही गाँव की उपजाऊ जमीन प्लॉटो में लुफ्त होती जा रही है और नापीक जमीन खेती के हिस्से आ रही है।” लास्ट वीक किरण दादा बता रहे थे कि “2 व्हिलर-4 व्हिलर के कितने विज्ञापन स्कीम के साथ आ रहे है, क्योंकि टार्गेट के अनुसार गाडियों की सेल नहीं हो रही है।”
और साथ साथ ही वॉटस्अॅप पर पृथ्वी का टेम्परेचर 1.० अंश सेल्सिअस बढने का और उससे पर्यावरण मैं आई आपदा और विपरीत परिणाम का व्हिडिओ भी दिवाली में वाइरल होते देखा। तभी याद आया… मेघा पाटकर जी को एक बार कहते सुना था…
“प्रगति ही मनुष्य की अधोगति है” ।
और फीर अपने आप को देखता हूँ.. तो हम सब होड़ लगाए बैठे है प्रगति के नाम पर…अलग-अलग तरिकों से।
*है ना… लाईफ इज मिस्टीरिअस बट ब्युटीफूल!*
क्रमश….
– आनंद मल्हारा


