Namastey Alawataji, Kya Hal Hai, Kaisa hai upar ka mahol?

Namastey Alawataji, Kya Hal Hai, Kaisa hai upar ka mahol?

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नमस्ते अलावतजी ,

क्या हाल है?
कैसा है ऊपर का माहौल ?
कोई कह रहा था ..
अलकाजी का ..आपकी बीबी का नया चश्मा पहनकर ऊपर चले गए …क्या ये सच है ? ऊपर बीमारी..शुगर वगैरे होती है या आल इस वेल?

पर आपसे एक शिकायत है…

खुद हंसते हंसते चले गए और हम सबको रोता पीछे छोड़ गए।

हर कमी को, हर हाल को, जिंदगी के हर उतार चढ़ाव को खुशी से अपनाकर आखिर तक हंसते रहे ..मस्त जीते रहे… हर किसी की मदद करते रहे, प्यार देते रहे..दिलदार बन लोगों को अपना बनाते रहे!

जानाही था इतने जल्दी तो अंत अंत में थोड़ा रूखे हो जाते… थोड़ा स्वार्थी हो जाते .. कठोर,झगडालू, निष्ठुर हो जाते…
ताकि आपके अपनोंका आपसे बिछड़ने का दुख थोड़ा ही क्यों न हो .. कुछ तो कम होता।

और जाते जाते भी सीखा गए ..

“हे इंसान इस पल को जी ले…
हर पल को बस जीते जा ..
मालूम नहीँ कौन… किसे… कब.. कहाँ… अकेला छोड़ चला जाएगा?

तो आजसे अकेला भी रहना…जीना सीखना शुरू कर दे रे मेरे यारा”।

नरेन्द्रजी …वी आल लव यू न मिस यू !