थँक्यू डॉक्टर…
आपने सूर्य प्रकाश खाने की दवाई दी।
एक मजेदार किस्सा है..
मेरे दोस्त कम ग्राहक महेशजी को एक छोटे से काम के सिलसिले में मिलने गया था… बातों बातों में उन्हें मेडिसीन फ्री लाईफ के बारे में बता रहा था.. तो अचानक उन्हें एक बात याद आई..
वे बताने लगे…
“आनंदजी, मैने कुछ दिन पहले टोटल बॉडी चेकअप की थी। ब्लड के रिपोर्ट में विटामिन डी केवल 4 आया था जो कि मेडिकल सायन्स के हिसाब से 20-40 होना जरुरी होता है।
टेन्शन हुआ.. डॉक्टर से मिला .. उन्होंने इंजेक्शन लिख कर दिए.. फिर मेरे सोलापुर के रिलेटिव डॉक्टर मालूजी ,एमडी को रिपोर्ट बताई। उन्होंने उसे देखकर चिंता जताई और प्राकृतिक चिकित्सा का विकल्प बताया.. कहा रोजाना खुले शरीर धुप में सुबह 10 से 4 के बिच में 15 मिनिट बैठना। मैने यह विकल्प पसंद किया .. ।
मैं रोज धूप में बैठा, १५ दिन बाद सोचा फिरसे ब्लड टेस्ट करवा लेते हैं और देखते है रिर्पोट नॉर्मल है या ज्यादा सिरिअस। टेस्ट में देखा.. विटामीन डी २४ हो चूका था।
बहुत अच्छा लगा।”
दोस्तों ,देखा… निसर्ग में.. कुदरत में कितनी ताकत है। धूप की किरणों में कितना चमत्कार है। किसीने सही कहा है.. यदि हम कुदरत के साथ रहते हैं , उसके नियम का पालन करते हैं तो निश्चित ही बिमारियां हमसे कोसों दूर रहेगी।
मेडिसीन फ्री लाईफ का प्रोग्राम भी यही था.. निसर्ग के साथ रहना और अच्छी लाईफ स्टाईल जीना ही हमारे हर मर्ज का इलाज है।
थँक्यू डॉ. चोरडीयाजी, डॉ.मालुजी… आपने हमें दवाई के बजाय प्राकृतिक विकल्पों से अवगत कराने का साहस दिखाया।
– आनंद मल्हारा


