हम अच्छा काम कब करते हैं?
हम अच्छा काम क्यों करते हैं?
चलो माना.. खुद की खुशी के लिए ।
पर सच कहो.. खुद को खुशी कब मिलती है?
जब कोई अपने काम की तारीफ करता है।
हम अच्छा काम करते है ताकि हमारा नाम हो, लोग हमें जाने, पहचाने..सच है ना ?
यह कभी सोचा है शहर गंदा क्यों रहता है? क्यों वह पूरा साफ नहीं होता ? क्यों सफाई करने वाले कर्मचारी पूरे दिल से काम नहीं करते?
मुझे ऐसा लगता है..या मेरा ऐसा मानना है…
एक तो हम खुद सफाई के बारे में पूरे जागरूक नहीं, हम हर कहीं कचरा डालते हैं,और चाहते है सफाई कर्मचारी दिन भर कचरा उठाता रहे जो कि असंभव है।
सफाई कर्मचारी काम में पूरी जान नहीं लगाता , काफी जगह ठीक से काम नहीं करता , पर आप बताओ आपको किसी सफाई कर्मचारी का नाम मालूम है? अपने कभी उसे नाम से बुलाया है? अपने उसे कभी चाई पिलाई है? कभी हमने उन्हें “आप “कहकर बुलाया है? दीवाली छोड़ दो। चलो जिसे दीवाली दी हो उसका नाम भी मालूम है?
नहीं ना?
अब बताइए क्यों वो काम करेगा जान लगाकर .. जब उसे कोई जानता ही नहीं , पहचानता नहीं, उसके काम की तारीफ नहीं..ऊपर से सबसे निचले दर्जे के काम का दर्जा।
किया , कम किया, नहीं किया तो क्या फर्क पड़ता है ..भी पगार तो मिल ही रहा है..।
घर में बीबी के काम की तारीफ नहीं की तो क्या होता है अलग से बताने की जरूरत नहीं।
जबकि सफाई का काम किसी से कम नहीं, घर में ,मोहल्ले में या शहर में यदि सफाई नहीं होती है तो कैसा लगता है बताने की जरूरत नहीं। सफाई है तो सेहत है, सफाई है तो सुंदरता है, सफाई है तो बरकत है.. कहते है ना” लक्ष्मी चा वास तिथे स्वछता जिथे “।
यदि हम अपने सफाई कर्मचारी को “लक्ष्मी दूत” या “आरोग्य दूत” कहे तो क्या ग़लत होगा? सोचो , गहराई से सोचो.. मुझे शतप्रतिशत लगता है उन्हें वो हक , वो रिस्पेक्ट,वो नाम देने का वक्त आ गया है। शायद ऐसा हुआ होता तो शायद देश को स्वछता अभियान लेना नहीं पड़ता।
खैर बहुत लिख दिया .. अब एक्शन लेने का समय है। आप ऊपर दिए नुस्खे अपनाओ और हम सब मिलकर जलगांव के ५ अच्छे सफाई कर्मचारी का जोर शोर से सम्मान करते हैं “आरोग्य दूत” के नाम से। चयन प्रक्रिया शुरू है।
जलगांव में दूसरे वर्ष हो रहे” helpfair” ( सेवा कर्याचा कुंभ मेला) इस अनुपम,अनोखे महोत्सव में इन चुने हुए कर्मचारियों का पहली बार सन्मान होगा..और लगातार होगा, आप हजारों की उपस्थिति में होगा, आपकी तालियों के साथ होगा।
आपको आना है और आपके अपनों को साथ लाना है।
ये एक नई पहल होगी, नई शुरुवात होगी जो सही मायनों में सेहत लाएगी , खुशियां लाएगी और हां लक्ष्मी भी।
आनंद मल्हरा


