Papa Web Series ka offer aaya hai.. par usamen “kissing”ka seen hai..  kya karen?

Papa Web Series ka offer aaya hai.. par usamen “kissing”ka seen hai.. kya karen?

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पापा वेब सिरीज का ऑफर आया है..
पर उसमें “किसिंग”का सीन है..
क्या करें?

मेरी बेटी को बचपन से ही शौक रहा है..बडबड करना और कॅमेरे के सामने पोज देना। उमर के साथ उसकी वकृत्व कला और खूबसुरती निखरती रही। स्कूल के हर एक इव्हेंट में हिस्सा लेना.. दिन रात प्रॅक्टिस करना और हर एक में जितना…
यह सब साकार करने उसकी माँ लठ लेकर पीछे पडी रहती थी।

लिबरल आर्टस में ग्रेजुएशन करते वक्त उन्हें ग्रुप में प्राजेक्ट करने होते थे। प्रोजेक्ट पर काम सब करते थे, पर प्रेजेंटेशन क­रना तनवी ने यह निश्चित था।

और फिर पहला जॉब भी मिला तो वह भी दिनभर बडबड करने का… रेडियो जॉकी का..
खूश थी.. खूश है.. कहती है… दिन कैसे शुरु होता है और कब खत्म होता है समझ ही नहीं आता। ऑफिस में काम करना पडता है… ऐसा लगता ही नहीं। क्योंकि वो वहाँ उसका मनपसंद बोलने का काम जो करती है। यह सच है.. हम जब हमारे पसंद का काम करते हैं तो काम काम नहीं रहता, वह एक ध्यान हो जाता है।

माईक सामने आते ही तन्वीमें आत्मविश्वास भर आता है। खुशी के रास्ते खुल जाते है उसके लिए… मेरे बिलकुल विपरीत.. मैं सोच सकता हूँ… लिख सकता हूँ.. पर बोलने खडा हुआ कि अ.. अ.. ब.. ब..
हो जाता है। बचपन में एक बार स्टेज पर क्या रो दिया.. आज ५५ साल हो गए..उस हार पर जीत नहीं मिला पाया।

खैर बात चल रही है तन्नू की..
रेडिओ में काम करके बोलने का शौक पूरो हो रहा था, पर कॅमरे के सामने पोज देने का शौक को नाम मिलना बाकी था। रेडियो स्टेशन पर अलग अलग अभिनेत्रियाँ, कलाकार आते ..उनका इन्टरव्ह्यु लिया जाता है.. वे जब जाती तो सहयोगी आपस में बात करते और कहते…” इससे अच्छी तो तन्वी है”। उसे भी यह सुनकर अच्छा लगता और उसके मन में बसी एक्टिंग की भूख ठंडी और बढ़ जाती।

कॉलेज में भी एकबार उसने ऐसेही “मिस दिवा” के ऑडिशन दिये और महाराष्ट्र में टॉप ८ में उसका चयन हो गया… आगे के राऊंड में फिर वो आऊट हो गई… पर जब भी उसे अ‍ॅक्टिंग का चान्स मिलता… चाहे वो शॉर्ट फिल्म हो.. अल्बम हो.. मॉडेलिंग इव्हेंट हो वो ना नहीं बोलती। और हमेशा खुदको इन्स्टाग्राम में लाईव्ह रखती है।

शायद इसी इन्स्टाग्राम के कमाल से मुबंई से फोन आता है… “बालाजी टेलीफिल्म एक वेब सिरीज बना रही है.. तुम्हें उसमें एक्टींग करनी है.. तो ऑडिशन के लिए आओ”। वह मुंबई गई ऑडिशन के लिए… ऑडिशन में सिलेक्ट हो गई.. साईड रोल था… उसे स्क्रीप्ट दी गई।
उसने स्क्रीप्ट पढी, सबकुछ ठिक था पर उसमें एक किसिंग का सीन भी था.. वह सहम गई… रात को नासिक आ गई..
दूसरे दिन उसने मुझे फोन किया और जो हुआ वह बताया और कहा … “पापा उस रोल में एक किसिंग का सीन है… क्या करें?”
मैं भी सुन्न हो गया…
क्या कहें? क्या ना कहें?
ऐसा हो गया..।

‘किस’ यह शब्द या किस करना मेरे लिए या हम सबके लिए कितना अहम विषय है.. यह कहेने की जरुरत नहीं।

किसी लड़के या लड़की का हाथ पकडना.. उसमें सालों लग जाते थे। तो यहाँ बेटी कह रही है इस रोल के लिए किस करना है.. समज नहीं आ रहा था क्या कहें? फिर बेटी ने बताया… “पापा यह एक्टींग है.. ड्रामा है.. आप पिक्चर नहीं देखते हो क्या.. जिसमें एक्टर्स को यह सब करना पडता है”।… मैं होश में आता हूँ.. फिर सोचकर कहता हूँ..” यदि एक्टींग तेरा सपना है तो रोल को निभाना होगा”।

पर वह कहती है “पापा आपको और मम्मी दोनों को साथ आना होगा शुटिंग पर, मैं अकेले नहीं जाऊंगी”। “ठिक है”.. हमने कहा और हम दोनों तनवी के साथ मुंबई आ गए शुटिंग के लिये।

शुटिंग के दिन ही हम दोनों स्टुडिओ के एक हॉल में बैठे थे। वहीं चाय, नास्ता वगैरे मिला। यूनिट हेड हमारा विशेष ध्यान रख रहा था। क्योंकि वहाँ सिर्फ हम ही पॅरेन्टस् आए थे।
हम नीचे थे और शुटिंग के शॉट अलग – अलग जगह चल रहे थे। उपरी मंजिल पर शुटिंग देर रात चलती रही। आखिर में एक शॉट खूब लम्बा खिंचा जा रहा था। युनिट हेड के चिल्लाने की आवाज आ रही थी। जल्दी जल्दी करो, फास्ट वगैरे। टीम के सभी लोग टेन्स थे। उनके साथ हमारी धडकने नीचे बढ़ रही थी।
मैंने मिसेस को कहा.. तुम उपर जाकर देखकर आओ.. देखों तनवी को कोईतकलिफ तो नहीं। काफि देर बाद भी जब मिसेस नीचे नहीं आयी तो मैं उपर चला गया। तन्वी दिखी तो शांति हुई.. वह पास आ गई… वह जब टेन्शन में होती है तो
‘जय माता दी ‘ स्टाईल में बोलती है। मैंने कहा ‘जय माता दी’ और पुछा “इतना लेट क्यों हो रहा है? तेरा शॉट ओके नहीं हो रहा है क्या”? उसने कहा “नहीं पापा, मेरा शूट तो बहुत अच्छा हुआ। उलटा डायरेक्टर कह रहे थे तनवी तुमने स्पार्क है, बहुत नॅचरल अ‍ॅक्टींग करती हो..”।
मैने दबी आवाज में पुछा तेरा वो वाला सीन हे गया ना?” वह बोली.. ” हाँ! लेकिन बहतु टेन्शन था… बहुत ऑकवर्ड फील हो रहा था..लेकिन मेरी लीड रोल की एक्ट्रेस जो काफी सिरीअल्स में काम कर चुकी थी, उसने मुझे हिंमत दी.. कहा तनवी Be Shameless in Front of Camera…. It’s Just Acting और हो गया”।

फीर मैं सोचने लगा..समझने लगा.. क्रिया एक होती है पर उसमें अलग ­अलग इमोशन्स होते हैं।
हम “किस” को ही ले… एक माँ अपने बच्चे को कीस करती है, एक प्रेमी अपनी प्रेमिका को और एक कलाकार स्टोरी के मुताबिक ५० लोगों के सामने वही क्रिया ड्रामें के रूप में करता है। एक्टींग करना.. डायरेक्टर कहता है उसमें जान डालो..और सीन के बाद उसमें से बाहर निकल जाना..।

धन्य है वो कलाकार और उसकी जानदार अ‍ॅक्टींग!