Dadar Se Jalgaon ka Safarnama… Nahin Baarish Mein Panchnama|

Dadar Se Jalgaon ka Safarnama… Nahin Baarish Mein Panchnama|

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दादर से जलगाव का
सफरनामा …नहीं बारिश में पंचनामा।

कल मुम्बई आया था बेटी को छोड़ने ..कारण था उसका थोड़ा ज्यादा समान और उसे बारिश कम पसंद होना। नासिक से निकले दोपहर 12.00 बजे और मुम्बई के अंधेरी पहुंचे रात 8.30 बजे.. कारण था हैवी रेन्स इन मुम्बई।

बस से बीच रास्ते उतरे, मुश्किल से ऑटो मिली और बेटी को घर छोड़ा, किराये पर लिया नया फ्लैट देखा तनय से बातें की और थोड़ा रुककर 9.15 को निकल पड़ा दादर की ओर रात 11.45 की अमृतसर एक्सप्रेस पकड़ने। जल्दी इसलिए भी निकला की रास्ते में कहीं लेट न हो जाये, बारिश जो शुरू थी। मुश्किल से थोड़ा चलने के बाद रिक्शा मिली जो स्टेशन के 15 मीनट के अंतर पर बंद हो गई..
फिर क्या पैदल स्टेशन पहुँचा। नसीब ठीक था , वेस्टर्न रेलवे शुरू थी । फ़ास्ट लोकल पकड़ कर 10.30 को दादर पहुंच गया।

5 नम्बर के प्लेटफार्म पर गाड़ी का इन्तेजार शुरू हुआ। गाड़ी 12.00 बजे आ गई। नींद जोर से आ रही थी , टिकट ध्यान से देखा नहीं , पुराना टिकट देख गलत बोगी में चढ़ गया, बेडिंग लगाया , सो गया। टीसी आया उठाया और बोला दुसरेकी सीट पर सोये हो, मोबाइल में टिकट चश्मा लगाकर चेक किया .. सामान उठाया और अपनी सही बोगी में बिस्तर लगाया और नींद लग गई।

सुबह 6.00 बजे मोबाइल पर घंटी बजी, श्रीमतीजी पूछ रही थी कहाँ पहुँचे? नींद में ही बाहर देखा, फिर मोबाइल का ऐप चेक किया .. बोल दिया कसारा में गाड़ी खड़ी है।
फिरसे सो गया। थोड़ी देर में फिरसे फोन बजा, उठकर बैठा ..आजुबाजु में देखा , पुछा तो मालूम पड़ा गाड़ी सायन में ही खड़ी है।
बाहर ध्यान से देखा तो पाया पटरियों पर पानी भरा है, लोकल ट्रेनें खड़ी है, लोग पैदल पानी में चलकर छाता लिए काम पर जा रहे हैं।

फिर समज आया.. बारिश की वजह से गाड़ी दादर में 3 घंटे रुकी थी और बादमें सायन आकर रुक गई..और अभी सुबह के10.00 बज गए हैं गाड़ी खड़ी है, लोकल बंद है, बाहर बारिश शुरू है। मालूम नहीं आगे क्या होगा, कब ट्रेनें शुरू होगी?

बम्बई के कॉलेज के दिन याद आते है और बारिश का मौसम भी। एक बार ऐसेही जोर से बारिश हो रही थी , फिरभी भरी बारिश में कॉलेज गया, सिंसियर स्टूडेंट का लेबल जो लगा था, कोई नहीं आया था, बारिश का जोर बढ़ गया था , फिरसे बांद्रा होस्टल की और निकल पड़ा, लोकल बंद, फिर क्या पैदल सैंड्हर्स्ट रोड तक .. वहाँ पापा का एक स्टूडेंट ग्रांट मेडिकल कॉलेज के होस्टल में रहता था उसके यहॉ पहुँच, रात को वहाँ सोया और सुबह वहाँ से लोकल में बैठकर होस्टल पहुँचा। पूरे 24 घंटे के बाद।

और 32 साल बाद आजका यह दिन फिरसे बारिश की चपेट में.. पर लोकल में नहीं तो एक्सप्रेस ट्रेन में।

थैंक यु प्रभु ..अबतक के इस मस्त अनुभव के लिए। देखते है ट्रैन कब शुरू होती है और हम जलगाव कब पहुँचते है।