Mumbai ki Baarish ani Anand ke Riste kaya Naam Doge?

Mumbai ki Baarish ani Anand ke Riste kaya Naam Doge?

  • 767 Views

मुम्बई की “बारिश “और
“आनंद” के रिश्ते को क्या “नाम” दोगे?

11 जुलाई की बारिश अर्थात पिछले महीने मुम्बई की धुँवाधार बारिश में मैं मुम्बई था और ट्रेन में मस्त रात और फिर पूरा दिन निकाला था, और कमाल की बात देखो.. कल कामसे मुम्बई आया था और फिरसे बारिश की चपेट में कहो या बारिश के तूफान में मस्त होना पड़ा।

पिछले बार मुम्बई से जलगांव जाते वक्त का किस्सा था अबकी बार मुम्बई आते वक्त का। पिछले बार अकेला था पर अबकी बार बीबी के साथ। स्टेशन “कुर्ला” पर सुबह के छः बजे गाड़ी खड़ी हो गई थी , करीब एक घंटा से गाड़ी हिल नहीं रही थी , लोकल भी चलते दिख नहीं रही थी तो सोचा चलो टैक्सी या ऑटो पकड़ कर ही अंधेरी जाते हैं ।

स्टेशन के बाहर निकले, बारिश जोरों पर थी, ऑटो ली.. वो बोला “अंधेरी तो नहीं बांद्रा स्टेशन तक छोड़ता हूं 200 रुपये लगेंगे.. वहाँ से लोकल पकड लेना”। मरता क्या नहीं करता। रास्ते में पानी इतना ज्यादा था कि ऑटो पानी में अटक गई। ऊपर से खड्डे में फंस गई। मैं नीचे उतरा और ऑटो वाले को धक्का मारने मदत की, ऐसे तैसे गाड़ी चल पड़ी, हाफ पैंट और कपड़े पूरे गीले हो गए थे पर बांद्रा स्टेशन पहुँच गए थे।

वेस्टर्न लोकल गोरेगांव तक शुरू थी, लोकल में बैठे। बहुत कम लोग थे, पहलीबार इतने कम लोग लोकल में दिखे थे। खिडकियों में से , दरवाजों में से पानी अंदर आ रहा था, सीटे गीली थी। अंदर “टॉप इन टाउन” ब्रांड के रेनकोट के विज्ञापन लगे थे.. आईडिया थी .. “एन्जॉय रोमांस इन मानसून”। उसमें फोटोग्राफ था एक कपल का जो रेनकोट पहने एक दूसरे की और देखते बारिश में भीग रहे थे। हम भी दोनों थे , अकेले थे, गीले भी थे पर मूड वैसा नहीं था, खैर।

अंधेरी से “तनय” के यहाँ फिरसे ऑटो लेकर निकल पड़े। ट्रैन में रश न होने से और जोरदार बारिश के कारण ऑटो जल्दी मिल गई। किराये के फ्लैट में पहुँचे, नीचे से साथ में गरम गरम चाय पैक करवा ली। ऊपर फ्लैट में जाकर उसे पी ली।

हम मुम्बई आये थे तनय का “ड्रामा” देखने। नाम था “मुआवज़े” और उसमें उसका अच्छा बड़ा रोल था। “सूत्रा” बना था। बारिश देखते लगता था शायद ही लोग आएँगे ड्रामा देखने। नहीं, फिरभी लोग आए थे, पर उनमें कलाकारों के दोस्त, सगे संबंधी ज्यादा थे। ड्रामा खत्म हुआ और हमने हमारी ट्रेन की पोजीशन चेक की तो पता चला आज सभी ट्रेनें कैंसिल की गई है इतनाही नहीं सुबह से कोई ट्रैन मुम्बई से निकली ही नहीं। परेशान हुए फिर खुश,चलो एक दिन बिन मांगे छुट्टी जो मिल गई।

आफिस में कह कर दूसरे दिन का सुबह की पहली गाड़ी “गीतांजलि” का , और एक रात वाली गाड़ी “अमृतसर” का रिजर्वेशन भी करवाया। रातको मेसेज आ गया सुबह की गाड़ी भी कैंसिल है, पर रात की शायद निकलेगी।
अब स्टेशन जाना है.. देखते हैं आज मुम्बई से निकल पाते या नहीं।

चलो ऊपरवाले की मेहरबानी से मुम्बई की बारिश में डुबनेकी, लुफ्त उठाने की हैट्रिक तो सही सलामत पूरी हो गई। एक कॉलेज के दिनों में और इन दो महीनों में दो बार। वैसेभी पानी और मेरा अब करीबी रिश्ता बन चुका है। घर , आफिस सभी पानी के करीब। और विडंबना देखो..एक महशूर पंडितने ने बहुत पहले मेरी हतेली देखकर कहा था … “आनंद पानी से दूर रहना।”

आनंद मल्हारा