बड़ा लाभदायी है, मजेदार है ये बैंडेज का छोटासा चौकोनी टुकड़ा।
कल थोड़ा बुखार आया था , रात को ब्लड टेस्ट करवाया, कम्पाउण्डर ने उसपर टेप लगा दी। आज सुबह- सुबह घर पर एक थानेदार किसी अनजाने काम से आ पहुँचे। इधर उधर की बातें, चाय के बाद उनका अनायास ध्यान मेरे हाथ पर गया.. जहाँ ऊपर फ़ोटो में दिख रहि व्हाइट पट्टी लगी है, देखते ही उनमें सहानुभूति जाग गई। पूछने लगे ” क्या हुआ सर? सब खैरियत तो है?” मैंने कहा “कुछ नहीं थोड़ा बुखार आया था, ब्लड चेक किया “, तो कहने लगे “मैं डॉक्टर को फ़ोन करु क्या, मेरे परिचित फलाने फलाने डॉक्टर है। मैंने कहा “नहीं में डॉक्टर के पास जाकर आया हूँ”। “हाँ आपके तो बहुत डॉक्टर पहचान के होंगे” उन्होंने कहा । खैर उनका काम कर नहीं पाया फिरभी वो खुश होकर गए।
आफिस में पहुँचा, एक परिचित कस्टमर आये, उनका भी ध्यान उस पट्टी पर गया, फिर उन्होंने मेरे चेहरे को देखा, बोले “आनंद भाई ,आज सलाइन लगाई क्या, तबियत नरम लगती है”। अक्सर लोगोंको में इन दिनों बीमार ही दिखता हूँ कारण ट्रीमिंग के चक्कर में चेहरे पर हरदम दाढ़ी का छोटे छोटे बाल जो होते हैं।
सिटी में निकला, आर सी के शोरूम गया , वहाँ भी एक ने मेरी वाइट पट्टी देख ही ली , बोला ” ब्लड डोनेशन करुन आले का भाऊ”? “नाहीरे.. ब्लड चेक केले” वगैरे।
व्हाइट चौकोन टुकड़े की इतनी लंबी कहानी इसलिए लिखी की मुझे आज एहसास हुआ कि यह छोटा बैंडेज का हाथ पर चिपका टुकड़ा.. बहुत कुछ कहता है,कहता ही नहीं कुछ अच्छा कहता है, लोगों में सहानुभूति जगाता है।
यदि कोई उसे ऐसेही लगा ले और आफिस लेट पहुँचे , तो ये पट्टी उसे डांट से बचा सकती है। कोई प्रोजेक्ट समय पर पूरा नहीं हो पाया तो बॉस को पट्टी बताकर एकबार तो बहाना बन सकता है।
देखा..अपना दिमाग कैसे उल्टा , शॉर्टकट रास्ते ढूंढने के काम भी करते रहता है।
खैर ये मेरा निजी अनुभव था और मेरी ही सोची “कल्पना”। जरूरी नहीं हरएक को यही रिस्पांस मिले। कोई इसके विपरीत भी पूछ सकते हैं , जैसे “काय पराक्रम केले टेस्ट करायला, सर्व ok ठीकठाक आहे ना?
क्रमशः..
आनंद मल्हारा


