Kyon itane dinon ke baad aaya ye suhaana bukhaar? chalo 600 dinon ke baad aaya to sahee!

Kyon itane dinon ke baad aaya ye suhaana bukhaar? chalo 600 dinon ke baad aaya to sahee!

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क्यों इतने दिनों के बाद आया ये सुहाना बुखार? चलो 600 दिनों के बाद आया तो सही।

याद नहीं पहले कब बुखार आया था पर परसों रात को थोड़ी सर्दी महसूस हो रही थी, गला भी थोड़ा दुख रहा था , उस पर ध्यान नहीं गया क्योंकि घर में बीबी को जो बुखार था साथमें सर दर्द था, सर्दी भी। जब वो बीमार गिरती है तो दूसरा कोई घरमें बीमार हो ही नहीं सकता क्योंकि उनकी बीमारी की गूंज इतनी होती है कि घर का हर कोई खुदको बीमार मानने लग जाता है।

सुबह उठा तो थोड़ा डाउन फील कर रहा था। बीबी थोड़ी ठीक थी। उसे स्कूल छोड़कर आने के बाद थोड़ा खुदके गले पर हाथ रखकर टेम्प्रेचर नापने की कोशिश की, बुखार लग रहा था। बेटी कह रही थी ” पापा अच्छा नहीं लग रहा है तो आफिस मत जाओ। फिरभी नाश्ता कर आफिस चला गया।

काम करते करते दोपहर हो गई, फिरसे खुद को फील किया, ठीक नहीं लग रहा था। घर आया। तन्वी ने पूछा ” पापा कैसे हो, खाना लगाऊ”? मैंने कहा “ठीक नहीं हूँ, रोटी मत दे खिचड़ी बना दे”। थोड़ा खाना खाया और पत्थर के बने सोफे सो गया। मैंने तन्नू को कहा “देखतो मुझे बुखार तो नहीं है”? उसने गले को छू कर कहा “पापा आपको तो तेज बुखार है, ठहरो थर्मामीटर से चेक करते हैं”। मुँह में उसे 2 मीनट रखा, फिर तन्वी ने उसे रीड करने की कोशिश की पर उसे समज नहीं आया, मरक्यूरी वाला थर्मामीटर आज भी अनेकों को पढ़ते नहीं आता है, यह भी एक सचाई है। मैंने देखा तो 103 था।
टेम्परेचर को सुन उसमें अचानक जोश आ गया, बोली “अब पापा चुपचाप सो जाओ, आज नो आफिस”। खुश हो गया। बुखार को थोड़ा फील करते करते बिस्तर पर लेटा। बेटी ने रजाई ओढा दी। बोली “पापा आप आराम करो ..सबसे पहले आप स्टीम लेंगे आपका नाक चोक हो रहा है”।

वो भगोने में गरम पानी ,उसमें वीक्स डाल कर साथमें टावेल ले आयी , टावेल सर पर डाल कर स्टीम ली अच्छा लग रहा था। विक्स की तेज खुशभु भी अच्छी लग रही थी। दो- तीन मिनट में नाक में से पानी आने लग गया तो रुक गया और फिर से लेट गया।

सीधा लेटा था। ओढ़ी हुई मुलायम रजाई का नर्म स्पर्श महसूस कर रहा था। ठंड फिर भी लग रही थी तो अंदर ही अंदर में सिकुड़ रहा था, दोनों हाथों से सीने को हल्के हल्के दबा रहा था। अच्छा लग रहा था।

तन्वी पासमें बैठी थी, उसका हाथ मेरे हाथ में था। मैं उसे कह रहा था, तन्वी आज बहुत अच्छा लग रहा है ..शरीर की गर्मी और उसके कारण लग रही मीठी मीठी ठंड, होले होले कांपना, रजाई का स्पर्श, एक पैर को दूसरे पैर पर रखना, और उसमें तू मेरे साथ होना और तेरा हाथ मेरे हाथोंमें रहना बहुत अच्छा लग रहा है। बुखार का सच में मज़ा आ रहा है।

वैसे आज फैक्ट्री जानेका प्लान था, इनोवेशन कमिटी की और ट्रिप के बारेमें चर्चा करनी थी। फैक्ट्री से निखिल का फ़ोन आया, तो मैंने तन्वी को कहा “तू प्लीज फैक्ट्री चली जा”। वो मना नहीं कर पाई। गाड़ी लेकर निकल गई।

मैं घर पर अकेला और घर पर काम करने वाली आजी। खुद में देखने लगा, फील करने लगा,मेरा ध्यान खुद की गर्म सांसों की और ही जा रहा था। आफिस के टेंशन से बिल्कुल फ्री हो गया था। आफिस का ना कोई काम याद आ रहा था, न कोई कस्टमर की कंप्लेन, नाही फैक्ट्री के कर्मचारियों की नाराजी, न मार्किट का स्लो डाउन, और नाही प्रतिस्पर्धी का बर्ताव। केवल ध्यान बुखार, शरीर में हो रहे हल्के दर्द और गर्म सांसों पर था। जिसकी तकलीफ, यातना दुनियादारी के टेंशन से बहुत कम महसूस हो रही थी। अच्छा लग रहा था। सच में मैं बुखार को एन्जॉय कर रहा था।

फिर सोचा ..जरा सो जाते हैं। एक साइड में करवट ले कर ,दोनों हथेलियों को जंघाओं के बीच रख नरम पड़े अवयव से शरीर की गर्मी नापता कुछ वक्त के लिए सो गया। अकेलेमें अक्सर ऐसेही सोने की मुझे आदत जो है।

ट्रिन ट्रिन फ़ोन की घंटी ने नींद उड़ा दी। आफिस से फ़ोन था, पूछ रहे थे “आफिस ला केव्हा येणार”? नींद उड़ गई थी , सोचा जरा फिरसे टेम्परेचर चेक करते है, चेक किया तो वही 103 । सोचा क्या किया जाए? बुखार आया और तुरंत दवाई लेना मुझे मंजूर नहीं था । डॉक्टर प्रवीण चोरडियाजी ने तो कहा था बुखार आना अच्छा है। बुखार आता है शरीर मे आई कोई गड़बड़ को दूर करने। हम दवाई लेकर बेचारे बुखार को ही मार देते हैं और गड़बड़ को जिंदा।
बुखार की वजह से थोड़ा कराह रहा था तो लगा जैसे ओमकार की ध्वनि बाहर निकल रही है। फिर दिमाग ने नए फार्मूले कि और ध्यान बटाया, उसने कहा ..”आनंद कराहने की बजाए ओमकार चाँटिंग कर के देख शायद उससे टेम्परेचर कम हो जाये”। ओमकार के जाप में या कोई भी जाप में बहुत ताकत होती है यह सुना हुआ भी है और उसे अमल भी करते हैं पर उससे बुखार कम हो सकता है क्या यह जानने में दिलऔर दिमाग दोनों उत्सुक हो गए । फिर क्या ओमकार चाँटिंग शुरू कर दिया धीमी धीमे आवाज में और वो भी सोते सोते ।

करीब एक घंटा हो गया था चाँटिंग करते, तब तन्वी फैक्ट्री से आ गई थी।
मुझे बड़बड़ाते देख पहले तो वो सहम गई, घबराकर बोली पापा क्या हो गया? पापा, ज्यादा तकलीफ हो रही है क्या? डॉक्टर को बुलाऊ क्या? धीरज डॉक्टर को फ़ोन करे क्या?
मैंने कहा “अरे कुछ नहीं, मैं एक नया प्रयोग कर रहा हूँ, ओमकार चाँटिंग से बुखार कम होता है क्या मुझे देखना है”। वो भी आंखे फाड् कर स्वीट किलिंग स्माइल देकर बोली “क्या पापा क्या है ये सब? चाय बनाऊ”? “बना आज तेरे हाथ की कम शक्कर की चाय पियेंगे”। वो चाय लेकर आई, हाथ पकड़ कर उठाया, दीवार को पीठ टिका कर बैठा। चाय पीते पीते उसे कहा “देख अपनी काम वाली आजी ..मैँ एक डेढ़ घंट से ओमकार का जाप कर रहा हूँ ,उसकी भाषा में कराह रहा हूं और उसने ये भी नहीं पूछा दादा काय झाले? काही त्रास होतोय का?
तन्वी बोली “ऐसा किया उसने, बोलती हूँ उससे”। थर्मामीटर लेकर वो आयी , चेक किया , टेम्परेचर 103 से बढनेको या कम होनेका नाम ही नहीं ले रहा था। मैंने तन्वी को कहा “एक घंटा और ट्राय करते हैं फिर सोचेंगे क्या करना है”… शुरू हो गया फिरसे ओमकार चाँटिंग।

चाँटिंग से एक फायदा हो रहा था , मुझे शरीर को हो रही तकलीफ कम महसूस हो रही थी। पूरा ध्यान सांसों की और जाते आते रहता था। जब शरीर की और ध्यान जाता तो तकलीफ महसूस होती और वो जैसेही सांसों की और जाता तकलीफ लुफ्त हो जाती। करीब 40-50 मीनट हुए थे कि बीबी के स्कूल से घर में पहुंचने की सूचना मिल गई। वो जब भी आती है गेट के अंदर पैर रखते ही घर में हलचल मच जाती है या कहो जान आ जाती है।सीढ़ी चढ़ते चढ़ते आजी बाई के लिए ऑर्डर्स देने शुरू हो जाते हैं।

“मनीषा ताई चाहा ठेवा”, बोलते बोलते वो रूम में आती है और मुझे सोते देख सपकपा जाती है, “तुम घर कैसे? तन्नू क्या हुआ पापा को”? हाथ लगाकर देखती है बोलती है “इतना बुखार है मुझे बताया क्यों नहीं, गोली ली क्या”? “नहीं” तन्नू तपाक से बोल पड़ी। “तन्नू पापा पागल है, अभी डॉक्टर को फ़ोन कर”। मैंने कहा “मैडम जरा आराम से पहले बैठो, मैं नया प्रयोग कर रहा हूँ ,ओमकार चाँटिंग का जो हम रोज सुबह योगा क्लास में करते हैं , देखना है उससे बुखार कम होता है क्या। लाओ थर्मामीटर एक बार फिरसे चेक करते हैं”, मैंने कहा। मैडम ने चेक किया, मैंने कहा “दो मिनिट हुए की बताओ “, मुझे पूरा यकीन है उन्होंने 2 की बजाय 2.5 मिनिट तक उसे मुँह में रखनेको लगाया ताकि टेम्परेचर ज्यादा से ज्यादा आये और वो मुझे डराकर दवाई खिला सके।
टेम्परेचर भी गजब था , फिर चौथी बार 103…

“बोलो अब क्या करना है, कौनसा प्रयोग करना बाकी है” ? मैडम ऊँचे चिंता भरी आवाज मैं बोली।

क्रमशः

आनंद मल्हारा