IIT के छात्र का छोटासा पर सहीऑब्जरवेशन !!
तनय के साथ मैं गुवाहाटी IIT कॉलेज आया था। सुबह उठने पर टाइम था तो 600 प्लस एकर के विशाल कैंपस में सायकल पर घूमने निकले। कॉलेज की कल्चरल कमिटी ने एक स्टूडेंट साथ दिया घुमाने जो इसी वर्ष राजस्थान से बी टेक करने कैंपस मेंआया था।
घूमते घूमते तनय ने सहज कहा “यहाँ मच्छर ज्यादा है”। उस लड़के ने कहा “हाँ है , पर यहाँ के मच्छर अलग है, भोले हैं “। “क्या मतलब” मैंने पुछा। वो बोला “ये मच्छर भाग जाते है जब हम गुड नाईट या कोई कॉइल लगाते हैं, कितने मच्छर तो उस धुवें से मर भी जाते हैं”।
तनय सुन रहा था “अपने यहाँ जलगांव में या मुम्बई में तो ऐसा नहीं होता, मेट से मच्छर भागते ही नहीं, वहाँ तो एक्स्ट्रा पावर वाली मैट या कॉइल लगानी पड़ती है ऐसा क्यों”?
तनय ने पूछा।
वह लड़का बोला “तनय सर, यहाँ का जो
नेचर है वह अन पौलुटेड है, हर जगह हरियाली है, शुद्ध हवा है , यहाँ के मच्छर भी यहाँ की हवा खाते हैं, उन्हें कोएल या मेट की केमिकल सहन ही नहीं होती, यहाँ के मच्छर मेट की खुशबुसेही भाग जाते है
या मर जाते है “।
और आगे बोला…”तुम मुम्बई की बात कर रहे हो, दिल्ली के नोएडा की तो तुम पुछोहि नहीं , वहाँ तो पॉल्युशन इतना अधिक है कि शायद ही मेट या कोएल वहाँ कोई असर दिखा पाती होगी”।
सही है.. शुद्ध हवा और पोललुटेड हवा का मच्छर पर इतना असर होता होगा तो उसका हमारे शरीर पर कितना असर होता होगा। देहात में आधी गोली से बीमारी ठीक होती होगी तो शहर में एक से और नोएडा जैसे शहर में तो शायद स्पेशल एडिशन वाली गोली से। फिर भी शहर में रोज भीड़ बढ़ रही है और साथमें पॉल्युशन भी।
आनंद मल्हारा
2 अक्टूबर 2019


