Dr. गुरुमुख भाई.. थैंक्यू भरा Jai Hind…

Dr. गुरुमुख भाई.. थैंक्यू भरा Jai Hind…

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Dr. गुरुमुख भाई..
थैंक्यू भरा सैल्यूट…

पिछले 15 दिन काफ़ी tension में बीते कारण था..बेटे “तनय ” के admission का चक्कर। एडमिशन तो हो गया पर कुछ सवाल उलझ कर “पहेली” बन कर रह गए…।

हुआ यूँ की …
तनय ने मुंबई के एक जानेमाने कॉलेज में BMM के लिए अप्लाई की। स्पोर्ट्स में नेशनल प्लेअर होने से special category में फॉर्म भरा था। मुझे नहीं, हमें भरोसा था admission हो ही जाएगा।

7 अगस्त को पहली merit list आती है… दुर्भाग्यवश उसका नाम उसमें दिखता नहीं .. निराशा होती है.. पर waiting list में उसका 1 नंबर पर नाम दिखता है तो जान में जान आती है।

11अगस्त को दूसरी merit list निकलती है… रात को करीब 10 बजे। खुशी होती है तनय का नाम merit list में आ जाता है। स्पेशल कैटेगरी में उसका Selection हुआ दिखता है। निश्चिंत हो जाते हैं।

पर यहीं से टेंशन शुरू होता है।

मेरिट लिस्ट के नीचे note होती है…..
13 तारीख़ तक document upload करो और फिर आपका online interview होगा और 15 तारीख़ को फीस के पेमेंट के लिए एक लिंक मिलेगी, जिस पर आपको 17 तारीख़ 3 बजे तक पैसे भरना है।

तनय 13 तारीख़ को certificate upload कर देता है और इंतज़ार करता है payment link और interview का। 15 तारीख़ आ जाती है कॉलेज से कोई जवाब नहीं आता। कॉलेज में फोन करते हैं तो उसे कोई नहीं उठाता। मेल भेजते हैं जवाब नहीं आता। राह देखते देखते अंतिम 17 तारीख आ जाती है… सुबह से tension शुरु हो जाता है। कंप्यूटर के सामने दो लोग लग जाते है। कोई call कर रहा है..कोई mail… पर कोई फायदा नहीं होता। फिर सोचते हैं चलो किसे फिजिकली कॉलेज भेजते हैं और जानने की कोशिश करते हैं कि माजरा क्या है? एक cousine जो मुंबई सेंट्रल रहता है.. उसे भेजते है। वो 2 बजे कॉलेज पहुँचता है.. देखता है कॉलेज में No entry, सिर्फ़ security गार्ड खड़ा है.. और वो कहता है ” कॉरॉना के कारण अंदर कोई नहीं है, हर कोई work from home कर रहा है, आप mail भेजो आपको जवाब आ जाएगा। कुछ दूसरे पेरेंट्स भी आए थे, उन्हें भी mail करने को एक कहा है “।

फिर सोचा शायद कंप्यूटर सिस्टम ख़राब हो गयी होगी या फिर सहिमें server down हो गया है इसिलिए पेमेंट की लिंक नहीं आयी है।

फिर हम कॉलेज को 1 लेटर लिखते हैं जिसमें लिखते हैं कि आपके link न मिलने से payment नहीं कर पाए। हमारा admission confirm समझो, आप जैसा कहेंगे वैसा पेमेंट कर देंगे।

तभी कॉलेज से एक शुभचिंतक का तनय को फोन आता है और कहता है “तुम्हारा नाम तो merit list में नहीं है”। सुनकर हम सब सपकपा जाते हैं, हम कहते हैं.. ” मेरे पास लिस्ट है जिसमें नाम है”। वह कहता है “नहीं.. तुम फिर से देखो वहाँ तुम्हारा नाम नहीं है”। फिर हम पुनः वही दूसरी merit list कॉलेज के साइट पर देखते हैं तो पाते हैं तनय का नाम उसमें से ग़ायब था। उस लिस्ट में special catogory का कोलम ही नदारद था.. जिसमें तनय का Selection हुआ था।

दिमाग़ घूमने लगता है, अलग अलग गलत ख़याल आने लगते हैं। एक लिस्ट में नाम और एक में नहीं..पहले लिस्ट में नाम आता है, बाद में गायब हो जाता है। विश्वास ही नहीं होता। क्या हुआ? कैसे हुआ? अब क्या करे? phone लगता नहीं, mail का जवाब आता नहीं तो फिर क्या….

ऐसे वक़्त दोस्त ही काम आते है। दोस्तों को फोन शुरू होते है। वो College जहां सिंधी लोगोका मैनेजमेंट है। अशोक भाऊ के साथ दोस्त “नंदू सेठ” से फोन पर बात होती है तो उन्हें भी आश्चर्य होता है। फिर वे हम सबके
डॉ. गुरुमुख भाई जगवानीजी को इस किस्से के बारे में बताते है।

डॉक्टर साब तुरंत “कॉलेज” के एक सीनियर ट्रस्टी को फोन लगाकर case बताते है और तनय को एडमिशन मिलना चाहिए यह भी कहते है, हमें मैडम का नंबर देते है और बात करने को कहते है। मैडम से बात होती है। उन्हें पूरी केस समझायी। उन्होंने सभी डॉक्युमेंट्स और दोनों मेरिट लिस्ट देखी। तुरंत principal के नाम डिटेल के साथ mail करने को कहा। उन्होंने साहस दिलाया, हिम्मत दी। कहा ” मैं पूरी कोशिश करूँगी, 50% चांसेस है काम होने के। धीरज रखो” कहा।

रोज़ाना मैडम को मैसेज द्वारा अपडेट पूछते। वे प्यार से, अपनत्व से जवाब देती।डॉक्टर साब को थैंक्स देने जाने की सोचा तो वे बोले “आनंद, ज़रूरत नहीं.. मैंने बोल दिया है काम हो जाएगा”। पर देखते देखते तारीख 17 से तारीख 25 हो गई। सात दिन गुज़र गए। कॉलेज का कुछ संदेशा आया नहीं, ना ही मैडम से।

इस बीच मैंने शिरपुर के “श्री भूपेश भाई” तनय के शुभचिंतक से बात की.. कहा “यदि “तनय” का काम कहीं नहीं हुआ तो आपको “मिठीबाई कॉलेज” में उसे admission देना होगा। उन्होंने नोट कर लिया। वैसेभी वे “राजा” लोग हैं।

Vivek Dhande, [05.09.20 21:16]
25 अगस्त की रात को भूपेश भाई का फोन आता है, वो कहते हैं ” मल्हार a तनय का एडमिशन UPG college में करने को कह दिया है , दलाल मैडम से बात कर लेना। सुनकर जान में जान आ गई। मैं प्रसन्न हो गया।

रात को ही SVKM के UPG कॉलेज के बारे में Online search किया। उपलब्ध कोर्सेस देखे। वहां BMM तो था ही.. पर एक नया “डायरेक्शन इन फिल्म , टेलीविजन एंड न्यू मीडियाज” का ग्रेजुएशन कोर्स भी दिखा।
फिर उस कोर्स का syllabus देखा.. तनय उस सिलेबस को देखकर ख़ुद को ज़्यादा कंफर्टेबल फील कर रहा था। हम सोचने लगे क्यों ना BMM की जगह इस नए कोर्स में ग्रेजुएशन कर लें?
दूसरे दिन दलाल मैडम से इस सिलसिले में बात होती है। मैडम से जब हम एडमिशन की बात करते है तब वह पूछती है कि “क्या आपने university का इस कोर्स के लिए फार्म भरा है “? “नहीं “.. हमने कहा। तो वो बोली “अब मैं कुछ नहीं कर सकती, जब फिर से university का एडमिशन का पोर्टल खुलेगा तब फॉर्म भरो। तब तक BMM में एडमिशन ले लो बाद में इस कोर्स में transfer कर लेना”। नसीब से दूसरे ही दिन यूनिवर्सिटी की साइट पुनः ओपन होती है । फार्म भरते है । फिर कॉलेज का फार्म भरते हैं, फीस भर देते हैं…
और चैन की सांस लेते हैं ।

लेकिन तभी स्टोरी में फिर एक ट्विस्ट के है….

एडमिशन होने के बाद सोचते हैं अब
पहले वाले कॉलेज की ट्रस्टी मैडम को और डॉ गुरुमुख भाई को बता देते हैं कि जो हुआ.. अच्छा हुआ..। डायरेक्ट फोन करने की हिम्मत नहीं हो रही थी… तो एक अच्छा सा मैसेज तयार करते है और उसे सुबह सुबह भेजने का प्लान करते है। पर मैसेज भेजने के पहले सुबह 10 बजे तनय के मोबाइल पर मैडम के फोन की घंटी बजती है..तनय थोड़ा डर जाता है, मुझे कहता है “पापा आप बात करो”। मैं कहता हूं ” बात तो कर, तुझे फोन आया है, सुन तो ले”। मैडम के आवाज में जोश था,खुशी झलक रही थी.. कहती है ” तनय ध्यान से सुन, अभी के अभी principal को तेरा एप्लिकेशन फार्म की कॉपी मेल कर… कॉलेज से किसी का तुझे अब कॉल आएगा और वे जैसा कहते है सब फटाफट कर..तेरा एडमिशन हो रहा है”। उधर डॉक्टर साब का नंदू सेठ को एडमिशन होने का फोन आ जाता है। इधर नंदू सेठ का लड़का आयुष तन्वी तनय की सिस्टर को एडमिशन होने का मैसेज text करता हैं । बोलो.. कौन कहता है “अच्छी खबर फटाफट नहीं फैलती”?

तनय सब सुन लेता है, मोबाइल रखता है।लंबी सांस लेता है और मुझे कहता है “अब आप बोलो मैडम को की एडमिशन मैंने दूसरी जगह ले लिया, मैं नहीं बोलूंगा”। पर हम सबको अच्छा लगा ..चलो अंत में ही सही, लेट ही सही है उस कॉलेज में एडमिशन मिला। हमारी श्रीमती तो बोल उठी “ले लो उसी कॉलेज में ही एडमिशन, उधर का कैंसल कर दो,इतनी मुश्किल से काम हुआ है”।

फिर हमारा तयार किया हुआ …कृतज्ञता भरा मैसेज मैडम को, डॉक्टर साब को और नंदू सेठ को भेज देते है। उसमें धन्यवाद देते है उस कॉलेज को कि उन्होंने गलती की, तनय का नाम लिस्ट में से नदारद किया, एडमिशन देने के लिए 7 दिन का अतिरिक्त समय लगाया। इसी गलती के कारण ही नई राह खोज पाए, नए कोर्स की जानकारी ले पाए और उसमें एडमिशन ले पाए।

मैडम से बात होती है, वो भी कहती है “ठीक है, वहीं करो जो बच्चों को पसंद है। ऊपर से यह भी कहती है “मैं प्रिंसिपल को कहूंगी, आपने निर्णय देने में लेट किया इसलिए एक अच्छा विद्यार्थी दूसरी जगह चला गया।

डॉ गुरुमुख भाई..आपको हमारा “धन्यवाद भरा सैल्यूट “। आप अलग हो, रॉयल हो, आपका अलग रुतबा है, आपकी समाज में अच्छी साख है।
आदरणीय ट्रस्टी मैडम , धन्यवाद! आपने तनय को न पहचानते हुए भी अपना माना , उसे हिम्मत दी,
और उसकी इच्छा पूरी की।
नंदू शेट..तुम्हीं आमचे मित्र , तुमचेही आभार , तुम्हीं हे सर्व जुड़वुन आनले.

चलो स्टोरी का अंत तो अच्छा हुआ, पर कुछ सवाल अंत तक अनकहे, अन सुलझे रह गए…
क्यों और कैसे तनय का नाम “मेरिट लिस्ट” में से गायब हुआ? क्या एक बार मेरिट लिस्ट में आया नाम फिर से निकाला जा सकता है? यदि नाम निकलता है तो क्या उसकी जानकारी विद्यार्थी को देना जरूरी नहीं? क्या कॉलेज को भेजे मेल का जवाब देना कॉलेज के लिए जरूरी नहीं?

तनय का तो ठीक है, उसकी अपनी पहचान है… पर ऐसा यदि एक “होशियार, आम” विद्यार्थी के साथ होता तो ????

चलो फ़िर भी लाइफ होती है unpredictable but beautiful too.

आनंद मल्हारा
31 अगस्त 20