थैंक्यू भारत..
आपने सभी पेट्रोल पंप पर toilet की व्यवस्था मुहैय्या जो करवाई।
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बात पिछले महीने की है, हम दोनों मिया बीबी सुबह के दोस्तों के संग जलगांव की अनदेखी टेकड़ियो पर घूमने गए थे। वैसे तो lockdown के पीरियड में एक्सरसाइज के तौर पर रोज सुबह ५.३० को अलग अलग जगह जाते थे।
सुबह का ठंडा मौसम , ७-१० कि. मि. पैदल चलना.. मज़ा आता था। इन डेढ़ से दो घंटों में मुझे अक्सर दो बार रास्ते में रुक कर पेशाब करना जरूरी हो जाता था। जंगल होता था.. मेरे लिए नो प्रॉब्लम। मेरे साथ के एक दो दोस्त और भी थे… उनकी भी वो जरूरत थी।
उस दिन हम सब थक कर एक जगह रुके। इधर उधर की बातें चल रही थी। मैंने जानबूझकर सहजता से सबके सामने बीबी को पूछा कि मैं रास्ते में दो बार फ्रेश होने रुकता हुं..पर तुम फ्रेश होने, पेशाब करने कभी रुकी नहीं.. क्या तुम्हें पेशाब नहीं आता?
सबके सामने वो सपकपा गई.. पर बोली “पेशा


