आज की ताज़ा खबर…

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आज की ताज़ा खबर…

BHR के संस्थापक अध्यक्ष “कैदी प्रमोद रायसोनी” को डूबी हुई पतपेढ़ी का नया “अवसायक” (Liquidator) नियुक्त कर सभी कर्ज वसुलने की कड़ी शिक्षा सुनाई गई।

(काल्पनिक)



( संदर्भ.. BHR जलगांव की एक पतसंस्था है जो संचालकों कि दिन रात की मेहनत से कम समय में मल्टी स्टेट का दर्जा प्राप्त करती है, उसमें गलत आर्थिक व्यवहार होते है, संस्था बंद पड़ जाती है, शासन द्वारा “अवसायक” नियुक्त किया जाता है ताकि कर्जा वसूला जा सके और निवेशकर्ताओं को पैसा लौटाया जा सके पर होता उसके विपरीत…)


…..पिछले 7 दिनों से जलगांव का हर न्यूज़पेपर बीएचआर पतसंस्था में हुऐ “अपहार पार्ट -2” की न्यूज़ से भरा पड़ा है। ( पार्ट 1 है…5 वर्ष पूर्व जब संचालक मंडल ने अपहार किया था ) तब शासन ने बीएचआर पर एक “अवसायक” नियुक्त किया था जिसका काम था कर्जा वसूल करना और निवेशकों को उनके पैसे लौटा ना… पर हुआ उल्टा ही। अवसायक और उनके सहयोगी ने मिलकर पिछले 5 वर्षों में निवेशकों की मजबूरी का फायदा उठाया और 20% 30% रकम देकर बाकी रकम हड़प कर ली।
इतना ही नहीं तो कर्जदारों की गिरवी प्रॉपर्टी को भी उन्होंने सस्ते दाम में बेचकर पैसा बना लिया और हाल ही में उनके पाप का घड़ा फूटा। और अब वे मुंह छुपाने इधर उधर भाग रहे हैं, छुप रहे हैं।

हा.. परसों पेपर मे एक न्यूज़ थी “अब
बीएचआर में “नया अवसायक” नियुक्त किया जाएगा”। उस पढ़ कर मेरे मन में एक खयाल आया… दिमाग उस पर सोचने लगा तो दिल और दिमाग दोनों कहने लगे… मुमकिन है,
मुश्किल जरूर है.. पर संभव है।

सोच रहा था कि ….यदि जज साहब ने बीएचआर के संस्थापक अध्यक्ष को ही उनके आर्थिक अपराध के तहत “अवसायक” बनने की और सभी कर्जदारों से पैसे वसूलने और निवेश कर्ताओं को पैसे लौटाने की कठोर शिक्षा दी तो कैसा रहेगा ? साथ में यह भी कहा कि तुम तब तक बीएचआर के हेड ऑफिस में नजर कैद रहोगे जब तक सभी निवेश कर्ताओं को उनके पैसे नहीं मिल जाते।

मुझे याद है हिंदी सिनेमा “दुश्मन” .. जिसमें एक खूनी को उसी परिवार की परवरिश करने की शिक्षा दी जाती है।
और वो सफल भी होती है।

मुझे लगता है.. यह संभव है। यह एक सकारात्मक प्रयास हो सकता है। संस्था के अध्यक्ष महोदय सभी बड़े “कर्जदार” से परिचित है, उनकी उन्हें मालूमात है। धीरे-धीरे ही सही पर वे पैसा वसूल कर सकते हैं… और बीएचआर अर्थात “भाईचंद हीराचंद रायसोनी पतसंस्था” पर जो दाग लगा है उसे जरूर धो सकते हैं।

संस्था के अध्यक्ष यह कार्य करेंगे या उन्हें वो करना पड़ेगा कारण इस संस्था को उन्हीं ने जन्म दिया है। बड़ा किया है। संस्था को बड़े गर्व से अपने “पिता… भाईचंद” का नाम दिया है। और कोई भी बेटा अपनी गलती से पिता के नाम पर लगी “कालिख” को जरूर पोछना चाहेगा।

यह मुश्किल काम इसलिए भी मुमकिन लगता है कि… अध्यक्ष प्रमोद रायसोनी होशियार है, शब्द के पक्के हैं, जिद्दी हैं, हिम्मत वाले हैं और व्यापारी भी। इन गुणों को उनके दुश्मन भी नकार नहीं सकते।
उनसे जरूर आर्थिक अक्षम्य अपराध हुआ है, जिसकी सजा वे भुगत ही रहे है।

वैसे छोटा- मोटा आर्थिक अपहार तो आजकी अर्थ व्यवस्था में हर कोई करता दिखता है। मैं भी खुद को उसीका एक हिस्सा मानता हूं । कोई दो पैसे बचाने के लिए करता है तो कोई एक्स्ट्रा इंकम के लिए। गौर करेंगे तो “करप्शन” के छोटे छोटे डोस तो “हम खुद” अपने बच्चे को बचपन से अनजाने में देते, सिखाते आते हैं। पलेही उसके नाम अलग अलग हो।

यह सच है.. BHR पर निवेश कर्ताओं का विश्वास था और संचालक निवेश कर्ताओं को सबसे ज्यादा ब्याज देने की चाह रखते थे। उनकी संस्था को भारत की सर्वश्रेष्ठ, सबसे बड़ी पतसंस्था बनाने का उनका अपना जुनून था, अपना स्वार्थ था।

पर मुझे दिल से लगता है.. न्याय व्यवस्था ने आर्थिक अपराधियों को अब जेल में न बिठाकर उन्हें “कर्ज वसूलने और निवेशकों को उनके पूरे पैसे लौटाने वाली नजर कैद की शिक्षा” देनी चाहिए ताकि आम जनता का बैंकों पर, पतसंस्थाओं पर विश्वास बना रहे। यह काम उनके अलावा कोई बेहतर कर ही नहीं सकता। ऐसी शिक्षा से अपराधी उसके किए अपराध का प्रायश्चित भी कर सकता है उससे से मुक्ति पा सकता है।

यह यदि असंभव या मुश्किल है तो फिर दूसरा ऐसा “अवासायक” ढूंढे जो “दूध का धुला” हो, जिसने पाप न करने की कसम खाई हो, कर्तव्य दक्ष हो… नहीं तो 5 वर्ष के बाद फिर से किसी के पाप का घड़ा फूटेगा या कोई किसी को एक्सपोज करने के लिए “बीएचआर अपहार पार्ट- 3” को आम जनता के सामने लाएगा और हम फिर बड़े चाव से डिप्रेशन में ले जाने वाली ऐसी न्यूज़ को सुबह-सुबह चाय के साथ बड़े चाव से पढेंगे और देश को सुधारने का ढकोस ली बाते करेंगे।
…और बेचारा निवेशक अपनी पूंजी पाने दर दर की ठोकरें खाता रहेगा… मजबूर होता रहेगा।

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But some times life is not that beautiful as it should be।


आनंद मल्हारा
5/12/20