मां के लिए पंखा लग्ज़री था और मेरे लिए आज ए.सी.।

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मां के लिए “फैन” लग्ज़री था और मेरे लिए आज “ए.सी.”।

माताजी “फैन” के ज्यादा चलाने पर रोक लगाती थी और आज मैं “ए सी” के इस्तेमाल पर बच्चों को रोकता हूं। पर “फैन” के यूज से आज मुझे दिक्कत नहीं।
अब न जाने बच्चों के लिए “कल” क्या लग्ज़री होगा, वे अपने बच्चों को किससे रोकेंगे मालूम नहीं….

But life is beautiful n round…it comes back.