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कितना मुश्किल है या असंभव है अपने “जीवन को”, अपनी “लाइफ को” प्लान करना जबकि सच यही है कि हम कब तक “जिंदा” रहेंगे यही हमें मालूम नहीं… कब कौन आएगा और उठा ले जाएगा… या हम कहा टपकेंगे इसकी कोई खबर नहीं।
ऐसा होते हुए भी हम सब… लाइफ के “गोल” सेट करते हैं, फ्यूचर “प्लान” करते हैं, बड़े बड़े “सपने” देखते हैं और… आज को हंसते रोते जीते रहते हैं।
चलो फिर भी “हम” ज्यादातर परिवार के साथ रहते हैं तो हमारे सपने, हमारे गोल हमारे प्लानिंग से परिवार जनों का जीवन आसान बनता है। कोई उसे पूरा करने वाला भी मिलता है।
पर जब मैं “त्रिलोचन” के बारे में सोचता हूं तब दिमाग काम ही नहीं करता। “त्रिलोचन” अकेला… ना आगे _ ना पीछे। उसने अपनी लाइफ को कैसे प्लान किया होगा? कितने साल जीने तक का किया होगा? क्या क्या सोचा होगा? हम सबके लिए एक अनकही कहानी रह गई।
जब फ्लैट में “पुलिस” आई थी और उन्होंने त्रिलोचन की बॉडी को देखा, उसकी रुकी हुई सांस को देखा तब जांच के तौर उन्होंने त्रिलोचन के कपाट को खोला था और ड्रावर में पडी ₹6000/ कैश देखी। वहां पड़ी एक अटैची भी खोली थी जिसमें इलस्ट्रेशंस, स्केचेस भरे पड़े हुए थे। पुलिस कह रहे थे क्या ड्राइंग का कलेक्शन है।
पिछले सप्ताह हमारी टीम फ्लैट की सफाई करने गई थी और क्या समान पड़ा है चेक करने गई थी। उन्हें सफाई के वक्त एक स्पेशल बैग देखी जो पलंग के अंदर ट्रॉली में रखी थी। काफी पुस्तकें भी थी ट्राली में। कपाट में एक थैली पड़ी थी जिसमें बैंको की फिक्स्ड डिपाजिट की काफी रिसीद पड़ी दिखी थी। उन्होंने मुझे फोन कर बुलाया और कहां सर, एक बार आप देख लो ताकि किसे कहा रखना है यह सोच सकें।
मैं फ्लैट आता हूं और सबसे पहले उनकी स्पेशल अटैची को देखने की जिज्ञासा होती है। वह अटैची सिस्टमैटिक तौर पर फोम शीट की हाथ से बनी थी जिसके अंदर त्रिलोचन ने अपनी बनाई हुई जीवन की बेहतरीन “पेंटिंग्स” संजो के रखी थी। हर ए2 साइज की पेंटिंग को नीचे से माउंट बोर्ड, ऊपर ट्रेसिंग पेपर लगा था। हर पेंटिंग अलग अलग कहानी कह रहे थे..। शायद वह त्रिलोचन की “आवाज़” थी… त्रिलोचन की “अनकही” कहानी थी। चूंकि त्रिलोचन अकेला था… ना कोई खास दोस्त ना ही कोई गर्लफ्रेंड।
तो शायद उसकी जीवन काल में बनाई पेंटिंग्स, उनकी किताबें, पसंदीदा मैगजीन ही उनके साथीदार रहे होंगे। जिसे उसने जीजान से संभाल कर, जतन करके रखा था। शायद वे अकेले में उनसे ही बातें करते रहते हो। साथ में काफी फोटो की नेगेटिव्स भी प्रॉपर रेप करके संभाल कर रखी थी। जो कॉलेज के दिनोकी प्राइज लेते वक्त की थी।
पेंटिंग्स श्रृंगार रस से प्रेरित थी, उसके अकेलेपन को दर्शाती अभिव्यक्ति थी। ताकि आप सभी उन आर्ट पीसेस को देख पाए। ट्रॉली में पड़ी किताबें,मासिक ज्यादातर इलस्ट्रेशंस, एनाटॉमी, फिगर ड्राइंग तथा न्यूड पेंटिंग्स की थी। शायद वही कलेक्शन उसका अकेलापन दूर करने का काम करता हो।
त्रिलोचन के कपाट में पड़ी थैली जिसमे बैंकों की एफ डी पड़ी थी।
मैंने तो नहीं देखी पर हमारे अकाउंटेंट शाह जी बता रहे थे …कम से कम 15- 20 लाख की एफडी की रिसिप्ट उसमें पड़ी है… जीस पर कोई वारिस का नाम नहीं है। त्रिलोचन आखिर किस पर भरोसा रखता, कैसे रखता? हर जगह स्वार्थ का बाजार जो वह देखता होगा। ऊपर से बचपन में कोई हादसा हुआ होगा जिसके कारण वो परिवार से कट गया था। पोटली में एक डायरी भी थी जिसमें कुछ लिखा था,पुलिस बता रही थी यह “कोड़” लैंग्वेज है। हमारे समझ के तो वो परे है शायद आप में से कोई उसे पढ़ सके तो जरूर संपर्क करें।
त्रिलोचन 71 साल तक जिया। क्या परफेक्ट प्लान रहा… हेल्थ एंड वेल्थ दोनों का। हर चीज सरप्लस रही… शरीर आखिर तक चलता रहा, काम करता रहा, दिमाग का संतुलन बना रहा। पैसे भी अंत तक चलते रहे, अच्छा खांसा बैलेंस भी रहा। कह सकते हैं जाते वक्त भी वो “जीने” का टैक्स सरकार को दे गया।
“त्रिलोचन” खजाना पीछे छोड़ गया यह कहना गलत नहीं होगा। कारण…
# पेंटिंग्स का अनमोल खजाना छोड़ गया।# एक इंसान अकेला भी रह सकता है और अपनी मर्जी से जी सकता है। सगे संबंधियों के बगैर अपने दोस्तों के साथ जीवन गुजार सकता है यह विश्वास देकर गया।
# अकेले रहना है तो… सेहत का ध्यान रखना, उसे संजो कर रखना, हर बुरी आदत, व्यसन से दूर रहना ताकि आगे पछताना ना पड़े..यह सीख देकर गया।
# पैसों का प्लानिंग कैसे करें, कैसे अंत तक आत्मनिर्भर बने रहे इसका एक अच्छा उदाहरण बनकर वह गया। 15-20 लाख की फिक्स्ड डिपॉजिट रिसिप्ट छोड़ कर गया।
मुझे लगता है “त्रिलोचन” ने निश्चित पूरे “100” साल जीने का ही सोचा होगा और वैसा ही था उसका फुल प्रूफ प्लानिंग भी रहा होगा। पर कहते है ऊपरवाले का प्लान केवल उसेही मालूम होता है।
त्रिलोचन की पेंटिंग्स का ऑनलाइन और ऑफलाइन एग्जिबिशन लगाने का मानस है। जल्द ही पेंटिंग्स के एग्जिबिशन का आमंत्रण आपको दूंगा।
…………………………………..समाप्त।
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है ना लाइफ इस अनसर्टेन but ब्यूटीफुल?
आनंद मल्हारा
४/४/२०२१
जलगांव
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