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आज हम जब दिन भर कोरोना की अलग अलग नकारात्मक कहानियां सुनते है, देखते है, पढ़ते हैं तो दिन ढलते_ ढलते हम निराश हो जाते है,सुस्त हो जाते है।
दो दिन पहले इसके विपरीत अनुभव हुआ, “फील गुड” लगा, थोड़ा “हल्कापन” का अहसास हुआ… शायद कारण बने थे….
१)
सुबह सुबह ऑफिस में फोन आता है हमारे पुनाके सहयोगी नरेशजी का..बदली हुई, कंपन वाली आवाज में कह रहे थे ” भाऊ आज घरी आलो, आम्ही दोघे पॉजिटिव होतो”, वेग वेगळ्या हॉस्पिटल मध्ये होतो, खूप त्रास झाला. मुलींनी सांभाळलं आम्हाला. भाऊ काही मदत शक्य असेल तर प्लिज.” मैंने “हां” कहा। और पूरा ध्यान रखने की कॉमन सलाह भी दे ही दी।
२)
उसी दिन दोपहर को एक और फोन आता है हमारे वेंडर “अजय” का। कहता है उसकी मां सीरियस है औरंगाबाद के एमजीएम अस्पताल में… ५_६ लाख का खर्चा हो चुका है, आईसीयू में है, कुछ मदद हो सकती है क्या? मैंने उसे भी “हां” कहा। दूसरा ऑप्शन ही नहीं था मेरे पास कुछ कहने।
३)
उसी दिन रात को हमारे एक सीनियर आर्टिस्ट संदीप का फोन आता है और कहता है “भाऊ माझ्या सासऱ्यांना आजच नाशिक ला शिफ्ट करणे आहे, इथे त्यांच्या हिरड्यांच्या complicated ऑपरेशन साठी डॉक्टर मिळत नाही, आपला कोणी ओळखीचा अंबुलन्स वाला आहे का भाऊ ? मैंने कहा हो जायेगा, टेंशन मत ले।
मैंने तत्काल हमारे परिचित स्नेही “पारोला” के “ईश्वर” को फोन किया, उसने एंबुलेंस की व्यवस्था कर दी। लेट रात को पेशेंट आराम से नासिक पहुंच जाता है।
दूसरे दिन संदीप का “थैंक्स” के लिए फोन आता है। नरेशजी को एवम अजय को यथा संभव “मदद” भी भेजी जाती है। वॉट्सएप पर उनका थैंक्स का मैसेज आता है। शायद मदद राशि उनके लिए उतनी सुखद नहीं होगी की वे फोन करके थैंक्स कहे। या हो सकता है वे अपनेही परेशानी में व्यस्त हो।
४) उसी दिन “श्रीमतिजीके” महिला मंडल के एक ग्रुप में किसे “प्लाज्मा” की जरूरत का मैसेज आता है, वो उसे उसके दूसरे “जिप्सी” ग्रुप में फॉरवर्ड करती है और इत्तेफाक देखो उस मैसेज को हमारे “कोरॉना वॉरियर” दोस्त “दिलीपजी” देखते है और प्लाज्मा की व्यवस्था बगैर कहे कर देते है। उस पेशेंट का भी काम हो जाता है।
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मालूम नहीं पर उस रात “हल्कापन” महसूस हो रहा था, “फील गुड” हो रहा था। कोरोना के डर के निगेटिव माहौल में भी “फ्रेश” लग रहा था। शायद यह जॉय ऑफ गिविंग ही था।
सलाम है सभी कोरोना योद्धाओ को। जो दिन रात अलग अलग रूप में मदद कार्य कर रहे है।
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लाइफ इस ब्यूटीफुल
Joy ऑफ giving is सिंपली great.
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आनंद मल्हारा
२५ अप्रैल २१


