भाग२
*
कहते है ना कोई भी चीज २१ दिन करो आदत लग जायेगी तो विपश्यना पलेही १० दिन की हो पर हर चीज यहां अनेकों बार करनी होती है तो उसकी आदत बनना आसान हो जाता है।
विपश्यना का शरीर पर, अपने मन पर होने वाले फायदे की बादमें बात करेंगे, अभी कुछ “साइड फायदे” बताता हूं…
१.. अपने पार्टनर के साथ होते हुए भी तुम अकेले मस्त रह सकते हो। अकेले रहने की प्रैक्टिस कर सकते हो। खुद से कहो या अपनी “सांस” के साथ दिन भर खुलेआम रोमांस कर सकते हो।
२.. पलेहि कितने अच्छे स्विमर क्यों ना हो यहां अपने “शरीर” के अंदर “मन” के सहारे तैरना सीखते हो।
३.. यदि वजन _पेट बढ़ रहा हो फिरभी रात के खाने पर काबू नहीं रहता तो “अमरभाई” की तरह केवल “नींबू पानी” पर रहना यहां सिख सकते हो।
४.. बोलने की बहुत आदत हो, गप लड़ने का बहुत शौक हो तो यहां बिल्कुल मौन, “आर्य मौन” रहना भी सीखते हो।
५.. फकीर कहो या भिक्षु बनने की यदि चाह है तो यहां वो बिल्कुल मुमकिन है, आपको दस दिन भिक्षु का, फकीरा का जीवन ही जीना होता है।
६.. मोबाइल को हाथ में लिए बगैर, खाली जेब चलने का असंभव सा अनुभव आप यहां पूरे १० दिन ले सकते हो।
७.. यदि आप आपकी क्षेत्र में अफलातून आइडियाज, अपनी समस्याओं पर सकारात्मक उपाय खोजना चाहते हो तो “विपश्यना” उसके लिए बेस्ट डेस्टिनेशन है।
८.. कारागृह में एक “कैदी” अकेले में कैसा रहता होगा, क्या करता होगा, क्या सोचता होगा.. उसका मिनी “ट्रेलर” यहां आप मजे के साथ शुनयागार ( मेडिटेशन सेल) में ले सकते हो।
क्रमशः
*
है ना “विपश्यना” अफलातून।
*
आनंद मल्हारा
१४_९_२१
*
*


