दुनिया गोल है..दुनिया छोटी है!

दुनिया गोल है..
दुनिया छोटी है!

  • 95 Views

बात कल की है।

तन्वी का सुबह सुबह कॉल आता है..कहती है “पापा मैं जिनके यहां पूना में आई हुं… जिनके यहां में २ दिन रुकने वाली हुं वे तो आपके क्लास मेट है।” यह सुनकर मैं भी चकरा जाता हूं । विश्वास नहीं होता। पर वह सच था। वो सुनील राणे मेरे १० वी कक्षा का क्लास मेट था।

किस्सा यह था कि..
तन्वी को “पूना” जाना था उसकी बन रही शॉर्ट फिल्म के डबिंग काम के लिए। प्लान के मुताबिक उसे उसके फ्रेंड “अपूर्वा” के यहां रुकना था। पर अंतिम समय मालूम पड़ा की उसकी फ्रेंड उस दिन बाहर गांव रहेगी तो अब कहां रूके? घर में यह बात चल रही थी। यही बात सुबह योगा क्लास में निकली तो “कल्पना मैडम (योगा साधक)” ने मेमसाब को कहा “नलिनी.. हमारी एक फैमिली फ्रेंड है जो रिलेटिव भी है, बिल्कुल घर जैसे हैं, तन्वी को वहां भेज दे पूना में बिल्कुल टेंशन मत ले। बहुत अच्छी फैमिली है। मुझे पूछा गया तो मैंने भी “हां” कर दी, कहा “तन्वी को मजा आयेगा, नई पहचान होगी।”

कल्पना मैडम ने उनकी फ्रेंड को फोन करके कह दिया। हमारी मेमसाब ने भी उनसे बात कर ली। और दूसरे दिन तन्वी सुबह सुबह पहुंच गई उनके घर। कुछ इधरकी उधरकी बातें हुई होगी उन तीनों की और राणे सर ने तन्वी को पूछा “जलगांव के मल्हारा प्रिंटर वाले कौन है?” वो तो हमारा है ” तन्वी बोली। तो वे बोले “तेरे पापा मेरे क्लास मेट है.. हम स्कूल में साथ थे।

यह अचानक सामने आए “संजोग” जानकर तन्वी खुशी से उछल जाती है। तत्काल मुझे फोन लगाती है। मैं जब यह सुनता हुं तो मैं भी चकरा जाता हूं। तन्वी राणे जी को फोन देती है .. हम दोनों बात करते हैं.. एक दूसरे को पहचानने की कोशिश करते हैं और पहुंच जाते हैं हमारे स्कूल डेज में , ला ना स्कूल के १० वीं क्लास में.. जहां हम साथ पढ़ते थे। पर चेहरा याद नहीं आ रहा था। उसके पिताजी याद आ रहे थे, हमारे टीचर थे। लंबे कद के, बड़ी मूंछ वाले। मैंने उसे कहा “फोटो भेज , शायद चेहरा याद आ जाए।”

राणे कह रहा था.. “मैं पूना में पिछले १२ सालों से रह रहा हूं, अब यहीं सेटल हो गए हैं। हम दोनों अकेले ही हैं। तेरी लड़की ने तो आज जबरदस्त खुशी दे दी हम दोनों को। उसने मुझे मेरे स्कूल दोस्त आनंद से, तुझ से मिला दिया।” यह भी कहा कि “अब खास जलगांव आऊंगा और तेरे यहां रुकूंगा, तन्वी ने खास आमंत्रण दिया है।” मैं भी कहता हुं जरूर.. जरूर आ, मजा आयेगा।

फोन पर जब यह बात हो रही थी तब मैं, आदरणीय जनार्दन महाराज एवम आर्किटेक्ट भावेश के साथ कोल्हापुर जा रहा था.. वहां सतपंथालय के लिए बनाने दिए शिल्प को देखने। महाराज को किस्सा बताया तो वे हंसे, और कहा “आनंदजी… दुनिया गोल है।”
और हम तीनों जोर से हंसने लग गए।


है ना लाइफ इज राउंड न स्मॉल।


आनंद मल्हारा
२५ नवंबर २०२१