हम दार्जलिंग से गंगटोक टैक्सी में जा रहे थे। प्रमोद नामक ड्राइवर गाड़ी चला रहा था। असल में उसका नाम कुछ “पसांग” था। एक गुजराती फैमिली ने उसे “पसांग” के बदले “प्रमोद” बुलाया तबसे उसने यही नाम बताना शुरू कर दिया। नेपाली “गोरखा” था।
वह हंसमुख था। बातें कर रहा था, खुद होकर अलग अलग जानकारी भी दे रहा था। रास्ते में आई एक स्कूल को देखकर बोला “ये दार्जलिंग की सबसे जानी मानी “नॉर्थ स्टार” स्कूल है, यहां “बर्फी, यारियां की शूटिंग हुई है।” मैंने सहज पूछा “क्या हर एक पैसेंजर को ऐसेही जानकारी देते हो?” ” हां साब, पर यदि कस्टमर गलत होता है तो हम गाड़ी से उतार भी देते है, कोई ज्यादा किट किट करते हैं तो हम उनके मुंह नहीं लगते, सुन लेते है, पलटकर जवाब नही देते, सोचते हैं कहां उनके साथ जीवन भर रहना है, कुछ घंटों का सफर है, कट जायेगा, हम लोगों का कैरेक्टर पहचान लेते हैं साब उनकी बातें सुनकर।”
बोलते बोलते कहने लगा “साब अपने चेहरे पर जितनी ज्यादा “हंसी” रहती ना उतनीही अपनी “उम्र” लंबी होगी।” उसकी यह बात सुनकर मैं चौंक गया, कितने आसान तरीके से उसने जीने की कला बता दी। “हम जब कभी हमारे धर्म गुरु को सुनते है तो वो सिर्फ जीने की कला बताते हैं, कहते हैं.. लोगोंकि मदत करो, मुट्ठी खोलकर दो , लोगों का अच्छा सोचो। वे कभी भी धर्म,जात पात, हिंदू मुस्लिम ऐसी बात नहीं करते।
मैंने बीबी के सामने फिरसे “जोर” देकर उसे पूछा “तुम्हे पूरा यकीन है, दूसरोंका अच्छा करने पर या अच्छा सोचने पर अपना अच्छा ही होता है?” वो बोला “110%अच्छा ही होता है साब।” “साब.. मैं लोगों का अच्छा सोचता हूं.. देखो मेरी खुद की गाड़ी हो गई। पहले मैं दूसरे की गाड़ी चलाता था।” वह सच कह रहा था।
वहां रास्ते में जगह जगह घरों के बाहर कंपाउंड में या घर के उपर अलग अलग रंगों के झेंडे लगे हुए दिख रहे थे। मुझे शुरू से वैसे वर्टिकल टाइप के पताका टाइप के, हवा में उड़ते “झेंडे” काफी आकर्षित करते रहे हैं। उसने उन जेंडो का मतलब समझाया, कहा “साब ये फ्लैग अलग अलग रिवाजों के लिए अलग अलग होते है। प्रसंगों नुसार उसके रंग बदल जाते हैं। हर झेंडे पर एक विशेष मंत्र लिखा होता है। जब वो लहराता है, फड़ फड़ करता है तब वो उसपर लिखा मंत्र हमारे लिए पढ़ता है जिससे हमें शांति मिलती है, हमारे कष्ट दूर होते है। कहीं मौत हुई है तो सफेद रंग, शादी या ग्रह शांति हुई तो रंगीन झेंडे लगाते जाते हैं। झेंडे पर मंत्र लिखे होते हैं, यह आज मुझे पता चला।
वहां की ठंडी, खुली हवा, हर जगह पहाड़ियां और उसपर हरियाली देखते “बीबी” ने प्रमोद को हंसते हंसते कहा “यहां तो कोई बीमार गिरता ही नहीं होगा, इतना ऑक्सीजन जो है यहां पर।” वो बोला “सही है मेमसाब, यहां घर का हर सदस्य काम करता है, खेतों में मेहनत करता है.. तो बीमार कम ही पड़ते हैं। पर यहां आदमी को अक्सर लीवर, पेट की बीमारी होती है। कारण यहां के लोग शराब बहुत पीते हैं। सस्ती जो है साब। सिक्किम में शराब पर टैक्स नहीं है ना!
है ना मजेदार बात। शराब सस्ती है, पर वही शराब दुख का कारण भी। पर था वो ड्राइवर बहुत सुलझा हुआ। शायद इसीलिए लोग उसे नेताजी कहकर भी बुलाते थे।
पिछले महीने “तन्वी” के साथ “गंगटोक” जानेका योग बन गया था। कुछ ऐसे ही मजेदार बातें हुई…
शेयर करूंगा…।
क्रमश:
सही है ना चेहरे पर जितनी स्माइल उतनी होगी लंबी उम्र। याने लाइफ इज more beautiful if we smile।
आनंद मल्हारा
10th Dec 2021


