आलस बहुत हुआ “आनंद”अब कुछ लिख।”

आलस बहुत हुआ “आनंद”
अब कुछ लिख।”

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होता है, अक्सर होता है, शायद हर किसी के साथ होता होगा..जब हमारी रूटीन लाइफ किसी प्रोजेक्ट से या किसी भी कारण ब्रेक होती है, उसमें रुकावट पड़ जाती है तो उसे पटरी पर आने वक्त लगता है। उसे शुरू होने इनर वाइस की, इनर पुश की या आज की भाषा में कहे तो “किक” की जरूरत पड़ती है।
मेरा भी कुछ ऐसाही हुआ। “हेल्प फेअर” के कारण मेरे कुछ शौक रुक गए। उसमेंसे आसन शौक जैसे “तैरना” शुरू हो गए पर “लिखनेका” थोड़ा ज्यादा वक्त मांगने वाला… थोड़ा जटिल शौक पीछे पड़ गया।

बीबी ने भी एक बार पूछा  “क्या हो गया आज कल लिखते नहीं हो?”

सोचा.. आज कुछ तो लिखेंगे ही।
वैसे बहुत सारी स्टोरीज आधे में रुकी है उसे पूरी करनी है जैसे हमारे बेनी की…

हाल ही में कुछ अच्छा पढ़ने को मिला था… शेयर कर रहा हूं …

# मेहरून चौपाटी के एक छोर पर एक सुंदर “मीनार” बन रही है। तालाब में तैरते वक्त अक्सर दिखती थी, पहले लगा शायद पानी की टाकी होगी, फिर लगा शायद सिक्योरिटी के लिए कुछ बन रहा होगा पर जब उसका फोटो “दिव्य मराठी” पेपर में आया तो समज के आया वो पंछियों का “शेल्टर” है, उनके रहने , प्रजनन करने की वो सुंदर सुविधाजनक जगह बन रही है। “मराठी प्रतिष्ठान”, “नगर पालिका” दोनों को बधाई। बहुत दिनों बाद एक एस्थेटिकली सुंदर स्ट्रक्चर पब्लिक स्पेस में बना है। दिव्य मराठी के संपादक “पटवे साब” को धन्यवाद आपने उस ऊंची मीनार को सबसे पहले अपने पेपर में जगह दी और उस काम की ऊंचाई बताई।
 
# अपने “हेल्प फेअर” के सहयोगी एवं मित्र “प्रकाश भाई” ने भी जलगांव वासियों के लिए पीपल्स बैंक ट्रस्ट के अंतर्गत चल रहे “श्री छत्रपति शाहू महाराज मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल” में हार्ट पेशेंट्स के लिए “कैथ लैब” की महत्वपूर्ण सुविधा उपलब्ध कराई है। अब वहां “एनजीओ प्लास्टी”, “एनजीओ ग्राफी” जैसी सेवा अत्यल्प दरों पर हमें उपलब्ध होगी। स्व.बाबू सेठ चौबे लो या उनके सुपुत्र “प्रकाश भाई”..सही में है “परफेक्शनिस्ट”। जो भी काम हाथ में लेते हैं उसे ऊंचाइयों तक ले जाते है। हम कामना करते हैं उनके हाथों ऐसेही अच्छे प्रोजेक्ट्स जलगांव वासियों के लिए संपन्न होते रहें।

# कल ही पेपर में पढ़ा जैन् इरिगेशन संचलित “अनुभूति इंटरनेशनल स्कूल” में अब जलगांव के बच्चे भी ५ वी कक्षा से “डे बॉर्डर” के तौर पर एडमिशन ले सकते हैं और वहां के निसर्ग से ओतप्रोत वातावरण में सभी सुख सुविधाओं के साथ बेहतर शिक्षा पा सकते हैं.. कल के अच्छे नागरिक बन सकते हैं। रेसिडेंशियल स्कूल में पढ़ाना, उसका खर्चा उठाना हर किसे संभव भी नहीं था। थैंक यू “अशोक भाऊ” आपकी इस सकारात्मक सोच के लिए।

# दातृत्व के धनी “स्व. रतनलालजी बाफना” के सुपुत्र “चि. सिद्धार्थजी” भी अपने दिवंगत पिता के पद चिन्हों पर अग्रसर है। पिताजी ने जो सेवा कार्य हाथ लिए थे, वे उसे उसी श्रद्धा के साथ, तन मन धन के साथ आगे ले जा रहे हैं । मुझे उसका अनुभव आया जब मैं उनके पास “हेल्प फेअर” के प्रस्ताव के साथ गया था और उनसे बिनती की.. ” आयोजन में आपके सहयोग की जरूरत पड़ेगी।” सिद्धार्थ भाई और पप्पू ( सुशील) भाई ने एक मिनिट में हामी भरी और कहा “जो प्रोजेक्ट भाईसाब को अच्छे लगते थे, जिसमे उनका सहयोग रहता था उन प्रोजेक्ट में, विषयों में आगे भविष्य में भी वैसाही सहयोग बना रहेगा। धन्यवाद ” सिद्धू भाई”।
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प्रभु आप सभी को अच्छी सेहत, और ढेर सारी खुशियां दे। आपकी संस्थाएं  प्रगति के नए कीर्तिमान प्रथापित करें।
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है ना लाइफ इस ब्यूटीफुल,
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आनंद मल्हारा
रविवार, २४ अप्रैल २०२२