जलगांव में घट रही कुछ सुखद बातें..

जलगांव में घट रही कुछ सुखद बातें..

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दीपस्तंभ के “मनोबल” प्रोजेक्ट की आर सी बाफना की गोशाला “अहिंसा तीर्थ” के समीप बन रही नई वास्तु देखने का योग आया। निश्चित ही यह जलगांव की गरिमा बढ़ाने वाला एक प्रोजेक्ट साबित होगा। देश भर के ब्लाइंड, दिव्यांग ,ग्रामीण विभाग के गरीब तथा आदिवासी  बच्चों को स्पर्धा परीक्षा या कोई भी एंट्रेंस की तयारी करवाने वाला यह प्रोजेक्ट अपने आप में अनोखा है।
भारत दादा के सुपरविजन में बन रही यह वास्तु इसलिए देखने लायक है कि वहां इन बच्चों को पढ़ने, रहने की सुविधा को ध्यान में रखकर २५_३० नए प्रयोग किए गए हैं। जिससे वे अपनी रोजमर्रा की जिंदगी आसानी से जी सके।

यजुवेंद्र सर बता रहे थे.. यह सेंटर देशका एक मॉडल सेंटर होगा, जहां IIT के बच्चे आकर यहां के बच्चों पर रिसर्च करेंगे। वे दिव्यांगो का जीवन ज्यादा सूखकर करने नए नए प्रयोग करेंगे।

देखा नहीं हो तो यह प्रोजेक्ट एक बार जरूर देखें, उससे जुड़े कारण आप सभी के सहयोग से ही उसे पूर्णत्व प्राप्त होगा।


कुछ दिन पहले रोज की तरह सुबह मेहरून तलाब पर तैरने गया था। हम जीस घाट से नीचे उतरते हैं वहां हर दिन काफी माल्यार्पण पड़ा मिलता है। जिसमें फुल की माला, नारियल, मटके, केले के पत्ते तो कभी कभी देवी देवताओं की फ्रेम्स, मूर्तियां आदि पड़ी मिलती है।

उस दिन वहां पूजा के समान के साथ एक जानी पहचानी किताब पड़ी मिली।
करीब जाकर देखा तो यकीन हो गया वो मेरे मित्र “डा.सुनीलदत्त” पर लिखी किताब थी। मेरे दूसरे मित्र उसे कई सालों से “बाबा” ही बोलते थे, पर मैं नहीं। उस दिन मेरा भी विश्वास हो गया .. डॉ. सुनीलदत्त अब “बाबा” बन गया है। अपने कर्मो से , अपनी समर्पित वैद्यकीय सेवाओं से उसने लोगों के दिल में जगह बना ली है।

अक्सर लोग पुरानी किताब या तो रद्दी में बेचते हैं या किसे पढने देते है पर कोई उसे तालाब या नदी में नहीं विसर्जित करता। विसर्जित किए जाते हैं ग्रंथ जिसपर हमारी श्रद्धा होती है। डॉ सुनिलदत्त की किताब को भी ऐसेहि विसर्जित किया गया था, अच्छा लगा।

प्रभु करे उनकी रुग्ण सेवा और उनकी inner journey ऐसेही नए नए मुकाम को पार करती रहे।


जलगांव के करीब फैजपुर में एक अनोखा धर्म सम्मेलन ( समरसता महाकुंभ) इस २९_३१ दिसंबर तक सतपंथ के आचार्य श्री जनार्दन महाराज के नेतृत्व में संपन्न होगा। भारत वर्ष के अलग अलग संप्रदायों के साधु संत इसे अपनी उपस्थिति से, अपनी वाणी से सुशोभित करेंगे। उद्देश्य एक ही है सबका ईश्वर एक है, मिल जुल कर रहे, आपसी प्रेम को वृंधिंगत करें। यदि संभव हो तो जरूर जाइए।
४.
दोंडाईचा के करीब “सारंगखेड़ा” में श्री.जयपालसिंह रावल के नेतृत्व में “चेतक फेस्टिवल” लगा है। घोड़ों का बाजार। एक से एक सुंदर घोड़े, करोड़ के कीमत के घोड़े, आप वहां देख सकोगे। घोड़ों की रेस, घोड़ों का डांस आप वहां देख पाओगे। बच्चो को भी मजा आ सकता है।

५.
एक और बात ने आजकी सुबह को सुखद की वो है..अपने दादा ने अर्थात “सुरेश दादा” ने अपने वारिस के तौर पर “अशोक भाऊ” का नाम सबके सामने रखा।
सुनकर मन थोड़ा विचलित हुआ पर धीरे धीरे स्थिर हुआ और महसूस हुआ इससे अच्छा जलगांव के लिए और क्या हो सकता है?

वैसे भी “अशोक भाऊ” का समाज सेवा ही शौक रहा है जबकि वो जैन ग्रुप के चेयरमैन है। यह एक सचमुच अच्छा विकल्प है.. इसके तीन कारण है उनके पास बड़े भाऊ के दिए वैश्विक दूर दृष्टि है, अच्छे संस्कार है और साथ में टेक्नोलॉजी के साथ अच्छे सलाहकार भी।

जैन परिवार “Leave this world better than you found it ” इस मूल मंत्र को से बखूबी जी रहा है, उसी तत्व पर उनकी कंपनी काम कर रही है तो वे शहर का, देश का गलत सोच ही नहीं सकते।

बड़े भाऊ जाने के बाद वे चारो भाई मिलकर कंपनी चला रहे हैं, चारों परिवार साथमें खाना खा रहे हैं । इसे देख हम कल्पना कर सकते हैं वे सभी पार्टियों को, नेताओं को साथ में रख कर काम कर सकेंगे। वैसे सही मायनों में अलग अलग पार्टियां, अलग अलग नेता माने तो एक दूसरे के “भाई” ही होते हैं। सबका काम जन सेवा, मानव सेवा ही होता है… हो सकता है रास्ता अलग हो या होना चाहिए।

और अशोक भाऊ ने दुनिया देखी है, और लगातार देखते रहते है, उनके पास टेक्नोलॉजी है, अच्छे सलाहकार है , ग्लोबल विजन है। नया करने का साहस है। काम करवाने की तकनीक है। अच्छे तो नेता होते ही है। हमारे नेता भी दिलके अच्छे है, दिन रात काम करते हैं.. पर आज केवल अच्छा होने से काम नहीं होता.. यह हम जलगांव की पिछले १०_१५ सालों की हालत देखकर कह ही सकते है।

चलो देखते हैं जलगांव की किस्मत में क्या लिखा है।

Have a good day!

 

Yes Life is beautiful…

आनंद मल्हारा
१६ दिसंबर २२