पीछे एक बार मैंने हमारे “बेनी” की प्रेम कहानी का जिक्र किया था। उस कहानी का पार्ट टू लिखना बाकी था जिसे मैं अब पूरा कर रहा हूं।
आखिर में जो होना था वही हुआ, शायद वही कुदरत को मंजूर था। हमने लाख कोशिश की पर बेनी को नहीं रोक पाए। और इस २८ अक्टूबर २२ को रात ३.०० बजे, गणेश घाट, जलगांव में उसने पांच बच्चों को जन्म दिया। नेचुरल डिलीवरी हुई। रात को बच्चों के “की इ इ”” की इ इ” की आवाज आनी शुरू हुई तो समझ में आया कि डिलीवरी हो गई है। समजदार “बेनी” ने नीचे के बाथरूम में मां बनना पसंद किया, जहां ज्यादा कोई आता जाता नहीं है।
मैंने जान बूझकर बच्चों के जन्म का विवरण दिया है। कारण आजकल कुंडली का महत्व बढ़ता दिख रहा है। हो सकता है कल हमारे मित्र इन बच्चों की मांग करने के पहले उसकी कुंडली चेक करें या उसे मिलाए। यह सोचने पर मैं मजबूर हुआ हूं कारण पिछले सप्ताह “तनवी” ने एक टीवी सीरियल के लिए ऑडिशन बनाकर भेजा था, ऑडिशन शॉर्ट लिस्ट हुआ होगा तो प्रोडक्शन हाउस ने तनवी को “कुंडली” भेजने को बोली। अर्थात जन्म का दिन,समय और स्थान। मतलब यही है अब हर फील्ड में इतनी अस्थिरता, इतनी रिस्क, इतना डर बढ़ गया है तो हर कोई इन नुस्कों को आजमाना चाहता है ताकि उसकी रिस्क कम हो जाए या उसे थोड़ी ही क्यों न हो मानसिक तसल्ली मिले।
एक एक्ट्रेस की कुंडली सीरियल में किससे मिलाएंगे.. सीरियल के एक्टर से या प्रोडक्शन हाउस से या टीवी चैनल से… राम जानें। पर मुझे दिख रहा है, या हो सकता है अब भविष्य में बड़े बड़े कॉरपोरेट भी नई रिक्रूटमेंट के वक्त नए उम्मीदवारों की कुंडली उनके कंपनी की कुंडली से मिलाने लग जायेंगे।
कहानी बेनी से कुंडली में भटक गई, चलो फिर से बेनी की और जाते हैं। बच्चे जो जन्में हैं… वो हां “क्रॉस ब्रीड” के हैं… “क्रॉस ब्रीड” के। हाल ही में मैंने एक पिक्चर देखी थी “Liger” जिसमें मां अभिमान के साथ कहती है उसका बेटा “क्रॉस ब्रीड” है, जिसमें “लायन” जैसी ताकत और “टाइगर” जैसी स्पीड है।
बेनी के इन बच्चों में भी “पामेलियन” ब्रीड का “प्रेम”, “अपनापन” और “इंडियन स्ट्रीट” ब्रीड का “स्ट्रॉन्ग इम्यूनिटी पावर” का मिश्रण होगा। एक और खास बात पांचों बच्चे “बाप” पर ही गए। पाचों ने “ब्राउन ब्लैक” कलर लिया है। मां जैसे “गोरे” कोई भी नहीं निकले। हम सबको विशेषतः श्रीमतिजीको ज्यादा अफसोस हुआ उन बच्चों के ब्राउनिश कलर से।
इधर हमारी श्रीमतिजी अर्थात बेनी की “धर्म मां” परेशान थी। वैसे उसने एक दिन पहले ही हमें कहा था “बेनी की एक दो दिनों में डिलीवरी हो जायेगी । शरीर में हुए बदलाव को वो सहज समझ गई थी, मां जो है। सुबह सुबह मैंने श्रीमतिजी को बेनी से बात करते उपर से सुना जब वो उसे दूध और पानी देने गई थी। श्रीमतिजी उसे कह रही थी.. “बोला था न , बाहर मत जा, मत जा, नहीं सुना अब भुगत अपने कर्म। कर तकलीफ सहन। तेरा स्ट्रीट रोमियो इन बच्चों का बाप नहीं आएगा तेरी मदत करने, बच्चों का ध्यान रखने”। श्रीमतिजी भी अंदर से परेशान हैं कारण अब उसे ही “बेनी” की केयर करनी है, उसके खान पान की व्यवस्था करनी है।
श्रीमतिजीने उनके माताजी से फोन पर बात की और पूछताछ की “अपनी गाय जब जनती थी तो उसे क्या खिलाते थे?” इधर सरकार मैडम को भी पूछती है “बेनी को क्या खिलाए जिससे जच्चा और बच्चे दोनों स्वस्थ रहें। अलग अलग सुझाव आ रहे हैं और घर में उसे अंजाम दिया जा रहा है।
कुछ महीने पुराने दिन याद आ रहे हैं, हम बेनी को उसके “मेटिंग पीरियड” के वक्त अक्सर उपर ही रखते। फिर भी वो भाग भाग कर आती थी नीचे उसके “रोमियो” से मिलने जो गेट के बाहर उसके इंतजार में उन दिनों दिन रात बैठा करता था। हम जब “बेनी” को फिर से उपर भगाते तब हमारी एक योग साधक कहती “आप ऐसा क्यों करते हो? क्यों उन्हें रोकते हो? मुझे लगता है हम उन पर जुल्म कर रहे हैं”।
मैं भी सोचने पर मजबूर हो जाता हूं। अंदरसे लगता है, यह गलत तो है, हम उनकी “नैसर्गिक” जरूरत को ही मार रहे हैं।
कुछ समय बाद फिर से मानवी स्वार्थ सामने आ जाता है। बच्चों को बडा करने की जिम्मेदारी दिखने लगती है। साथ में “अहंकार” भी जागता है… हमारी “इंपोर्टेड पामेलियन बेनी” ऐसे कैसे एक “स्ट्रीट डॉग के साथ मिले और बच्चों को जन्म दे?
है ना लाइफ इज ब्यूटीफुल yet mysterious
आनंद मल्हारा
३० अक्टूबर २२, जलगांव।
नए साल का तोहफा बेनी ने जन्म दिए पांच


