अंडमान पहुँचने की यात्रा संपन्न हुई “टाटा” के चार्टर प्लेन से।

अंडमान पहुँचने की यात्रा संपन्न हुई “टाटा” के चार्टर प्लेन से।

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क्रमशः भाग २

उस दिन हमारी फ़्लाईट पोर्ट ब्लेयर न उतरते पर हिलते हुए पुनः क़रीब ३.३० या ४.०० तक चेन्नई पहुँच गई। थोड़ी राहत मिली। सभी सैलानियों की सांस में सांस आयी। सभी यात्रियों से कहा गया बेल्ट no ४ के पास इकट्ठा होने और आगे का प्लान जानने।

सभी लोग वहाँ इकट्ठा होते हैं । वहाँ पहलेसेही “एयर इंडिया” की महिला ऑफिसर खड़ी होती है। सबको वेलकम करती है और कहती है “घमा सान बारिश और तूफ़ान के कारण पोर्ट ब्लेयर एयर पोर्ट अथॉरिटी ने रन वे बंद कर दिया था। और आप तो जानते ही हैं वहाँ पर शाम को लैंडिंग अलाउ नहीं करते तो हम सबको आज चेन्नई में ही रुकना होगा। कल सुबह कितने बजे फिरसे उड़ान ले सकेंगे इसकी जानकारी जुटाना शुरू है। आप सभी को नये बोर्डिंग पास इशू किए जाएँगे। पर आपको अपनी रात रुकने की व्यवस्था करनी होगी।” किसी ने कहा “हम कहाँ व्यवस्था करेंगे? हमें कुछ मालूम नहीं “.. तो वे बताने लगी “१७० लोग हैं.. हमारे पास इतनी व्यवस्था नहीं होती है रुकाने।” लोगों में बैचेनी शुरू हो गई।

उन यात्रियों में एक महिला थी, सीनियर सिटीजन थी। पोर्ट ब्लेयर की ही थी…बाद में मालूम पड़ा वो वहाँ के प्रसिद्ध अन्नपूर्णा रेस्टॉरेंट की मालकिन थी। उसने कहा बुलाओ “तुम्हारे मैनेजर को…उनसे बात करेंगे।” मैनेजर आते हैं। वो कहती है “देखो सब पैसेंजर परेशान हो कर थक कर आये हैं… सबसे पहले चाय कॉफ़ी दो , नाश्ता दो।” तुरंत उसकी व्यवस्था हो जाती है । क़रीब ३० मिनिट में पुलाव, उपमा, कोशिम्बिर और एक स्वीट का इंतज़ाम एयर इंडिया कर देती है।

मैनेजर के सामने अलग अलग लोग अलग अलग डिमांड रखते हैं पर सबका सार एक ही था…रहने की व्यवस्था, रात के खाने की व्यवस्था..होटल जाने तथा सुबह आने की व्यवस्था करें। मैनेजर अलग अलग सोल्यूशन दे रहा था । वो कह रहे था हमारे पास इतने रूम्स नहीं है चेन्नई में पर कुछ रूम्स दिल्ली में है… कुछ मुंबई में और कुछ कोलकाता में। यदि आप में से कोई वहाँ जाना चाहता है तो हम उन्हें वहाँ भेज देते है और वहाँ से ही उन्हें पोर्ट ब्लेयर भेज देंगे।”

वो महिला फिर से फ्रंट पर आती है और सबको कहती है “शांत हो जाओ .. रुक जाओ। इनसे सिर्फ़ एक ही बात करेगा शांति से… हम सब की तरफ़ से…ये चाहते हैं हम अलग अलग हो जाये ताकि उनकी सहूलियत के हिसाब से इस समस्या का हल निकल जाये। हमको मिलकर ही बोलना होगा, एक बनकर रहना होगा।”

उन्होंने मैनेजर से कहा “हम सब कहीं नहीं जाएँगे….हम सबको यहीं चेन्नई में होटल में रुकवाओ और कल का टेक ऑफ का टाइम बताओ तब तक कोई यहाँ से नहीं जायेगा।” मैनेजर ने टाइम माँगा। तबतक सभी पैसेंजरों ने एयर इंडिया द्वारा दिया जा रहा नाश्ता कर लिया।

आधा पौन घंटे बाद क्लियर हुआ…उन्होंने चेन्नई में ही तीन चार होटल वालों से बात की…सबके रहने की व्यवस्था की .. सभी होटलें थ्री star लेवल की थी। वहाँ पहुँचाया, ख़ाना खिलाया और सुबह फिरसे एयरपोर्ट लाया .. नये बोर्डिंग पास दिये.. फिरसे चेक इन हुआ और सुबह ६.०० बजे स्पेशल फ्लाइट से हम सब १७६ यात्रि पोर्ट ब्लेयर के लिए निकल पड़े। सुबह का समय था तो फ्लाइट में फिरसे नाश्ता .. चाय मिली और प्लेन से बाहर निकलते वक़्त पूरे एयर क्रू ने महाराजा स्टाइल में थैंक्स भी कहा।

मैंने उस महिला से कहा “ये तो अच्छा था की फ्लाइट एयर इंडिया की थी नहीं तो दूसरी एयरलाइन कितनी सर्विस देती क्या मालूम ?” वो कुछ बोली नहीं पर हंस दी।

मैंने श्रीमतीजी से कहा उठो बाराती .. एयर इंडिया की बारात में बहुत मज़े उड़ा लिए… थ्री स्टार होटल.. नाश्ता.. ख़ाना .. पिकअप ड्राप…फिर स्पेशल “चार्टर प्लेन”ले जाने के लिए ऊपर से “थैंक यू एयर इंडिया फ्लाइट चुनने के लिए” और क्या चाहिये?

उतरते वक्त सबके चेहरे खिले थे । हाँ रात को जब होटल में ख़ाना खा रहे थे तो मैंने सोचा इस हादसे के कारण एयर इंडिया का कितना बड़ा नुक़सान हुआ होगा? १७६ पैसेंजर को दो बार अतिरिक्त हवाई जहाज में घुमाना, रहने की खाने पीने की व्यवस्था करना…नहीं कहे तो भी ५० लाख से कम नहीं होगा। सोच कर मुझे बुरा लगा। बीबी को बताया…तब बीबी ने मस्त कहा…एक अच्छा लॉजिक दिया… कहा “देखो “एयर इंडिया” टाटा की है …रतन टाटा ने शादी नहीं की है। कोई बाल बच्चे नहीं है.. हम ही है उनके बच्चे.. पूरा भारत की जानता उनकी अपनी है। जो भी हमसे से कमाया है वह हमीं पर खर्च हुआ है , घर में ही खर्च हुआ है …! इसलिये मुझे इस नुक़सान का ज़्यादा दुख नहीं हो रहा है।

यह लॉजिक सुनकर मैं गद गद हो गया….! झुककर मैंने मेमसाब को सलाम ठीक दिया।

एयर पोर्ट पर स्वागत करने ट्रैवल वाले का ड्राइवर pluckcart लेकर खड़ा था अंडमान की सैर कराने….!

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लाइफ इस ब्यूटीफुल
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आनंद मल्हारा
१६/१०/२३, जलगाँव
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