ऐसा ही चलते रहा तो शहर के पुराने बने घर जल्द ही पानी में डूबने लगेंगे।

ऐसा ही चलते रहा तो शहर के पुराने बने घर जल्द ही पानी में डूबने लगेंगे।

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हाँ यह सच है।
हाल ही में जलगाँव का एक महत्वपूर्ण रास्ता जो काव्य रत्नावली चौक से शुरू होकर कलेक्टर ऑफिस से रेलवे स्टेशन तक जाता है, उसके पुनर्निर्माण का कार्य शुरू है।डाम्बर का रास्ता अब सीमेंट कांक्रीट का बन रहा है।
अच्छी बात है, रास्ता ज़्यादा साल टिगेगा।

पर दुर्भाग्य की बात है, जितना भी काम हुआ है वहाँ रास्ता क़रीब १२ इंच याने एक फीट ऊपर आ गया है। वैसेभी आजतक शहर में वैसेही काम होता आया है। जब भी कहीं रास्ते की मरम्मत होती.. नई खड़ी, डाम्बर की परत पुराने रास्ते पर डाल दी जाती और वही रास्ता ३-५ इंच ऊपर आ जाता।

मुझे याद है हमारा पुराना जीपीओ के पास का घर जो रास्ते के काफ़ी ऊपर था फिर भी उसकी तीन सीड़िया, साइड का नाला १५ सालों में रास्ते के नीचे आ गया और बारिश का पानी घर में घुसने लग गया था।

अब जलगाँव का मुख्य रास्ता १२ इंच ऊपर आ गया है। बेचारा रास्ते के बीच का डिवाइडर अब बटलर दिखने लग गया है ।
अब जो घर उस रास्ते पर पुराने बने होंगे उन्हें टेंशन आ गया होगा और जो नये काम होंगे वे एक फीट से ऊपर बनेंगे कारण हम अक्सर रोड लेवल से ३-४ फीट ऊपर तक अपने घर की प्लिंथ रखते हैं।

एक फीट ऊपर आये रोड का इंपैक्ट क्या होगा आपने कभी सोचा है ?

१ सबसे पहले तो डिवाइडर की हाइट बढ़ानी पड़ेगी। नाले अपर लाने पड़ेंगे।

२ जिसका घर नीचे आ गया है उसे अपने घर तक का स्लोप मैंटेन करने सिविल वर्क अपने खर्चे से करना पड़ेगा।

३ जो घर बन रहे है उन्हें अपनी प्लिंथ एक फीट ऊपर के जानी पड़ेगी।

४ आज के बाद उस परिसर में जो भी घर बनेगा वहाँ उन्हें यह ऊपर आये रोड के लेवल से काम करना पड़ेगा।

५ धीरे धीरे वह पूरा परिसर एक फीट से ऊपर आ जाएगा

५ इस एक गलती के कारण भविष्य में कितनी मुरम, खड़ी ज़मीन खोद कर निकालनी पड़ेगी आप ही हिसाब लगा लो।

६ भविष्य में इस काम के लिये कितना पेट्रोल, डीज़ल , सीमेंट , रेती अतिरिक्त लगेगी इसका हिसाब भी आप ही लगाओ।

थोड़ा सोचो और आप ही बोलो …

१ क्या एक फीट रास्ता ऊपर लाकर रोड बनाना सही और लाभदायक विधि हो सकती है ?

२ क्या हम रास्ता बनाते वक़्त थोड़ा खर्च ज़्यादा कर पुराने रास्ते को स्क्रब कर रास्ते की पुरानी लेवल मैंटेन नहीं कर सकते है ?

३ क्या रास्ता बनाते वक़्त आम जानता को होने वाली तकलीफ़, नुक़सान का कौन ज़िम्मेवार होगा?

४ पर्यावरण का होने वाले नुक़सान का कौन ज़िम्मेवार होगा?

५ क्या शहर के मा. कलेक्टर साब यह नहीं देख रहे होंगे?

६ क्या हमारे विधायक, लोक प्रतिनिधि को ये दिखता, समझता नहीं होगा?

अब भी वक़्त है , थोड़ा ही रास्ता बना है, और वो कोई नेशनल हाई वे नहीं हैं जहाँ रोड को एक लेवल में लाने की कोशिश की जाती है। क्या हम उस अमल में लाए जाने वाली विधि पर थोड़ा चिंतन कर रोड निर्माण का सही विकल्प को चुन नहीं सकते?

यदि आप जलगाँव निवासी नहीं भी हो पर रोड का काम अक्सर हर शहर में ऐसा ही होता है, रोड की मरम्मत के वक़्त पुराना मटेरियल निकाल कर उसी लेवल में नया काम होना चाहिए पलेही दो पैसे ज़्यादा लगे… यदि आप इस विचार से सहमत हो तो ज़रूर इसे शेयर करिए। बात छोटी है पर पर्यावरण के लिए बहुत गंभीर है।

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if we care , लाइफ इस ब्यूटीफुल।

आनंद मल्हारा
७/१२/२३, जलगाँव

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