“बैंकाक ,पट्टाया गये और मसाज नहीं किया तो क्या किया?”
ये डाइलॉग हमारे दोस्त “बिपिन पंडित ” के मुख से मैंने सुना था..याद आ गया जब हाल ही में हम दोनों थाइलैंड गये थे। वैसे हम जा रहे थे “फ़ुकेट” में पर था वो थाइलैंड में ही।
वैसे औरतों को शेख़ी बघारनेका शौक़ थोड़ा ज़्यादा ही होता ही है, श्रीमातीजीने तीन चार सहेलियों को बताया कि “मैं घूमने थाईलैण्ड जा रही हूँ” तो सामने वालों की रिएक्शन देखकर उसके कान भी खड़े हो गए। एक ने तो यह भी कह दिया “और कोई देश मिला नहीं क्या तो थाईलैण्ड जा रहे हो ?” उसने मुझे कहा थाइलैंड के बारे में लोगों की राय ठीक नहीं है तब मैंने समझाया “उन्हें फ़ुक़ेत बोलो, थाइलैंड नहीं।” फ़ुक़ेत बहुत खूबसूरत और अच्छी जगह है, अच्छे बीचेस हैं “ पर फिर भी उसके मुँह में “फ़ुक़ेत” शब्द नहीं आता कारण वो नाम हमने भी पहली ही बार सुना होता और निकलता तो “पट्टाया” और “बैंकॉक” ही।
मुझे याद आ रहा है शादी की २५ वीं साल गिरह पर घूमने हम “खजुराहों” गए थे। काफ़ी उत्सुकता थी मुझे जवानी से वहाँ जानेकी। वहाँ से आने पर मैंने अनेकों को कहा मैं खजुराहो गया था, तब सामने वाला चौंक कर देखते बाद में यह भी कहते “हमें भी बताते तो हम भी आ जाते।”
ख़ैर, फ़ुक़ेत में जाने का वैसे हमारा कोई प्लान नहीं था। पर हुवा यूँ कि एक दिन “तन्वी” को मेल आता है और उसमें केवल ₹ 8000/- में Marriot vacation club, Fuket में चार दिन रहने की ऑफर होती है । काफ़ी tempting proposal था, प्रॉपर्टी 7 star की थी। साथ में उनकी कुछ कंडीशनस भी थी। घर वाले सब इसके ख़िलाफ़ थे, कह रहे थे ये “फ्रॉड” होगा।पैसे वेस्ट मत करो। खूब तलाश करता हूँ पर अंत में मैं जाना तय करता हूँ, उन्हें एडवांस पैसे भेज देता हूँ और ट्रैवल एजेंट से बात कर फ़ुक़ेत के ४ दिन और बाद के ३ दिन का प्लान बनाता हूँ। जिसमें २ दिन “पट्टाया” और १ दिन “बैंकॉक” तय होता है। उस प्लान के मुताबिक़ फ्लाइट के टिकट्स होटेल्स आदि की बुकिंग क़रीब १ महीने पहले की जाती है।
जाने के क़रीब १० दिन पहले ट्रैवल एजेंसी का कॉल आता है और कहता है कि “thai lion airlines” की तुम्हारी रिटर्न फ्लाइट कैंसिल हो गई है। आप एक दिन आगेकी फ्लाइट ले सकते हो या चाहे तो पूरा रिफ़ंड ले सकते हो। मैंने पूछा रहने की व्यवस्था वे करेंगे क्या ? नहीं का जवाब आया। तो हमने काम की वजह से एक दिन पहले का दूसरी एयर लाईनस का नया टिकट बुक करवाया। ट्रैवल वाले ने फिरसे पैसे लिये और रिफ़ंड के पैसे १२० दिन के बाद एयरलाइंस की तरफ़ से आने के बाद ही मिलने वाले थे। मैंने उन्हें कहा भी “टिकट तुमने बुक किया है , रिफ़ंड भी तुम्हें ही आएगा, नये टिकट का हमसे क्यों पैसे ले रहे हो, लेना है तो डिफरेंस का पैसा लो।” पर उन्होंने कहा “वह हमारी गलती नहीं है । एयर लाईनस जब पैसे देगी हम लौटा देंगे।” हम थे मजबूर।
मुझे लगता है बाहर की ट्रैवल एजेंसी से जब हम काम करते हैं तब ये प्रॉब्लम ज़्यादा आते हैं। बहुत बार हम फँस जाते हैं या अटक जाते हैं कारण हम उन्हें एडवांस दे चुके होते हैं।
क्रमशः भाग २
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but लाइफ इस ब्यूटीफ़ुल!
आनंद मल्हारा
१ जनवरी २४, जलगाँव
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