अंतिम भाग …
रिटर्न फ्लाइट “बैंकॉक” से रात में था तो हम टैक्सी से बैंकॉक दोपहर पहुँचते हैं। सोचा चलो चार पाँच घंटे बैंकॉक में घूम लेते हैं। कुछ ख़रीद दारी करते हैं कारण तन्वी ने कहा था वहाँ से कुछ कपड़े ख़रीद कर लाना। बैंकॉक ख़रीद दारी के लिए प्रसिद्ध है ख़ासकर फैशनेबल कपड़ों के लिये, उसी ने कहा था।
लगेज कहाँ रखेंगे यह समस्या थी, सोचा “प्लैटिनम मार्केट” में ही कहीं क्लॉक रूम ढूँढेंगे और वहाँ सामान रखकर पर्चेसिंग कर एयर पोर्ट पहुँच जाएँगे। “गूगल” किया तो एयर पोर्ट पर भी क्लॉक रूम है यह समझा । एयर पोर्ट के क्लॉक रूम में समान रखा और वहाँ से ट्रेन से मार्केट पहुँचे, ख़रीद दारी की और फिरसे ट्रेन में बैठ कर एयर पोर्ट पहुँच गये। थाईलैण्ड की ट्रेन का भी सफ़र हो गया।
मार्केट के पास खाने का प्लान किया तो वहाँ veg खाना कहीं मिले ना। मैकडॉनल्ड में गये , वहाँ भी veg आइटम नहीं थे। अंत में subway में vegan आइटम मिला और वो खाकर हम एयर पोर्ट पहुँचते हैं , चेक इन कर के अंदर आ जाते हैं तो पाते हैं फ्लाइट ३ घंटे डिले हो गई है। क्या करें सोचने लगे, थक भी गए थे।
अंदर अपने गेट के पास जाकर एक जगह बैठ जाते हैं जहाँ एयर कंडीशन की हवा कम आती थी। बीबी सोने की कोशिश करती है,। मैं उठता हुँ और निकल जाता हुँ अंदर के अलग अलग शॉप्स को देखने ।वापस आता हुँ तो सामनेही एक “थाई मसाज” का स्टूडियो दिखता है।जेब में २००० भाट पड़े थे । श्रीमतीजी को नींद से उठाता हुँ और पूछता हुँ “यहाँ मसाज करवा ले क्या? सुनकर मिसेज़ ग़ुस्सा हो जाती है, कहती है “तुम्हारा दिमाग़ ख़राब हो गया क्या ? अभी जाने का वक़्त है और तुम्हें मालिश की सूझ रही है।” मैंने कहा “अरे सुनो तो, फ्लाइट में २ घंटे बाक़ी है और मसाज ४५ मिनिट की है ८००-८०० भाट लगेंगे। अपने पास जो भाट पड़े हैं वो भी ख़त्म हो जाएँगे, बोलो क्या करें? ना ना करते अंत में ग़ुस्से में कहा “बोलो कहाँ जाना है?” हमऔर पोर्ट के अंदर के ही एक थाई मसाज पार्लर में गये और हाथों, पैरों और कंधों की मसाज करवा ली। थके पैरों में, शरीर में थोड़ी जान आ गई। और दिल को तसल्ली दे रहा था कि जब कभी “बिपिन” मिलेगा तो उसे कह देंगे पट्टाया भी गये और मसाज भी करवा ली।
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समाप्त।
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है ना life is never ending story पर खूबसूरत!
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आनंद मल्हारा
६-१-२४, जलगाँव
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