Part 5 : पट्टाया के “वॉकिंग स्ट्रीट” के रंगीन नज़ारे !

Part 5 : पट्टाया के “वॉकिंग स्ट्रीट” के रंगीन नज़ारे !

  • 417 Views

भाग ५..

शाम को हम दोनों पट्टाया के मार्केट में घूमे। मार्केट में सबसे ज़्यादा कोई दुकान दिखी वो थी “सलून कम ब्यूटी पार्लर और डेंटल क्लिनिक की।” वहाँ की ज़्यादा तर महिलायें बाहर काम करती है और लगता है वो अपनी ख़ूबसूरती को लेकर बहुत ज़्यादा जागरूक हैं। हर दुकान में महिलाओं की, लड़कियों की गर्दी होती है।

रास्ते में ढेर सारे रेस्टॉरेंट दिखे। उसमें से अनेक इण्डियन थे। पंजाबी, साउथ इंडियन, गुजराथी, राजस्थानी सभी रेस्टोरेंट वहाँ दिखे। इतनाही नहीं पानी-पूरी, भेल- चाट, पान के भी वहाँ दुकाने थी। जहाँ “फ़ुकेट” में veg खाने के लाले पड़ रहे थे तो “पट्टाया” में सभी इण्डियन डिशेज़ अवेलेबल थी।

हर रास्ते में मसाज पार्लर भी थे। कहीं फुट मसाज, कहीं थाई मसाज,कहीं बॉडी मसाज के बोर्ड लगे दिख रहे थे। सोचा मसाज कराएँगे तो दोनों साथ करायेंगे, Why men should have all the fun? यह स्लोगन याद आया “होंडा प्लेजर” गाड़ी के विज्ञापन का।पर कहीं रुकने की , किसी पार्लर में जाने की हिम्मत ही नहीं बनी।

उसी शाम हम वहाँ के फेमस अलकाइज़र शो देखने गये। ट्रैवल वाले ने ही उसके टिकट बुक किए थे। वो एक डांस शो था जिसमें क़रीब ५०-७५ लड़के लड़कियों का ट्रुप था जो अलग अलग डांस मंच पर प्रस्तुत करते। अच्छी कोरियोग्राफी, विशाल बैक ड्राप का उन्हें साथ था ।

और दूसरे दिन रात हम वहाँ की फेमस “वॉकिंग स्ट्रीट” पर गये जहाँ पर अलग अलग बियर बार, क्लब, डांस बार शुरू थे। हर जगह सुंदर लड़कियाँ ही लड़कियाँ दिखती। रास्ता पूरे टूरिस्ट से भरा था। कोई आ रहा था तो कोई जा रहा था। रास्ते में एक दो जगह पुलिस भी बैठी थी। शायद उनकी इजाज़त से ही वो स्ट्रीट जगमगा रही थी। ज़्यादा तर क्लबो में लड़कियाँ अपने शरीर की नुमाइश करते दिख रही थी या कहो तो शरीर का व्यापार करते दिख रही थी।

सच कहो तो शरीर या कोई भी वस्तु ढकी हुई होती है तो हो तो उसका आकर्षण रहता है, जब वह ढँका नहीं होता तो उसका आकर्षण कुछ ही समय में ख़त्म हो जाता है। सच कहो तो वो कुछ समय बाद ugly लगने लग जाता है। शायद कुछ ऐसा ही अनुभव वहाँ आये अनेक सैलानियों को होता होगा।

हम भी वहा एक क्लब में उत्सुकता वश जाते हैं, कुछ समय बैठते हैं पर उनकी शरीर द्वारा प्रस्तुत विकृत अदाएं १०-१५ मिनिट से ज़्यादा देख नहीं पाते और बाहर आ जाते हैं। बीबी बाहर आकर कह उठती है इतनी सुंदर लड़कियों को कोई और काम नहीं मिलता है क्या जो ऐसा काम पैसों के लिए करती है? मैं क्या जवाब देता? देस परदेस के अनेक लोग बाग थाईलैण्ड जाते भी तो यही सब कुछ देखने अनुभव करने।

भूख लग जाती है तो हम एक काठ्या वाडी veg होटल में जाकर मस्त गुजराथी खाना खाते हैं। अंत में छास का ग्लास पीकर रूम लौट आते हैं।

क्रमशः अंतिम भाग ६
***

है ना लाइफ इस फुल ऑफ़ क्यूरोसिटी yet ब्यूटीफुल?
***

आनंद मल्हारा
६-१-२४, जलगाँव
***
***