तन्नू की शादी नहीं तन्नू की बारात..

तन्नू की शादी नहीं तन्नू की बारात..

  • 267 Views

***

तन्नू …
तन्नू आज तेरे संगीत में तनय ने मुझे स्टेज पर आकर तुझसे बात करने को कहा था। जब से संगीत की तैयारी तनय कर रहा था, करवा रहा था तभी से तनय ने मुझे यह रोल सौपा था । मैंने ख़ुशी ख़ुशी हाँ कहा । उसने कहा था “जो आपके दिल में है, जो आपने अभी तक उसे कहा नहीं होगा या जो आप उसे उसके जीवन की नई शुरुवात में कहना चाहते हो वो आपको बोलना है।”

तेरी शादी, तेरी बिदाई, और तेरी जुदाई और ऐसे समय तुझसे स्टेज पर बोलना इतना आसान नहीं था । जब जब में कागज लेकर बैठता और कुछ लिखने की शुरुवात करता … मुझे स्ट्रेट वे “रोना” आ जाता या दिल भर आता। लिखते लिखते, तयारी करते करते तेरी यादों को याद कर कितनी बार मैं रोया तुझे बता नहीं सकता।

पर तन्नू परसों कमाल हुआ । अपनी तान्या ( परिवार की नई पुत्र वधु ) वेदु (१८ महीने की गुड़िया) को लेकर घर आई थी । हम बात कर रहे थे, तेरी मम्मी कह रही थी “अब ये घर सुना हो जाएगा, तन्नू ससुराल की हो जाएगी।” यह सुनकर तान्या सहजता से कहती है “नल्लू काकू अब जमाना बदल चुका है।अब पहले जैसा नहीं है।लड़कियाँ अब बेटों से कम नहीं होती। वे ससुराल भी जाती जाती है, वहाँ के तौर तरीक़े सीखती है,नई जिम्मेवारी अपने सर लेती है और साथ ही अपने माँ बाप का भी ख़याल रखती है। मुझे भी देखो मैं कैनेडा से शादी के लिए दो महीने यहाँ आई , एक महीना मैं यहाँ हूँ अगले महीने मेरे मम्मी पापा के साथ।”और उसने मुझे कहा “आनंद काका तन्नू जाएगी सही है पर आपको एक बेटा दामाद के रूप में “प्रथम” भी तो मिल रहा है । जो आप दोनों का भी खयाल रखेगा।” तन्नू यह सुनकर सचमें मुझमें हिम्मत आ गई ।

तन्नू मुझे मालूम है तू थोड़ी care-less है, जरूरत से ज़्यादा chill है, थोड़ी un-organised है। स्टेशन पर लेट पहुँचती है ,चलती ट्रेन में चढ़ती है, चढ़ते वक़्त हैंड बैग की चैन भी अनेकों बार खुली होती है। कपाट में कपड़े अस्त व्यस्त पड़े होते हैं। ठीक है , है तो है । वक़्त के साथ आदत बदलती जाएगी। पर तन्नु तेरी असली ताक़त है, तेरे असली गहने है …तेरी हँसी, तेरा हँसना – हँसाना, तेरा हँसमुख स्वभाव , तेरी मीठी अपनत्व भरी बोली, तेरा देसी अंदाज़, तेरा caring नेचर, घर को ख़ुशनुमा बनाने का तेरा अंदाज़…तन्नू उसे वक़्त के साथ कम मत होने देना। तेरे उस स्वभाव को बरक़रार रखना । तेरी ये खूबियाँ अनमोल है , rare है जिसकी हर घर में आज बहुत ज़रूरत है।

तन्नू एक बात ध्यान रखना परिवार के हर सदस्य में, समाज के हर व्यक्ति में एक अलग quality होती है, उसमें एक अलग खूबी होती है, अच्छाई होती है साथ ही उसमें कुछ कमी भी, कमजोरी भी। तू हरदम उस अच्छाई का साथ देना, उस क्वालिटी को निखारने के लिए प्रोत्साहित करना और उसकी कमजोरी को नजर अंदाज कर उसे वहाँ संभाल लेना।

विश्वास रखना इस पृथ्वी पर जो भी है उसे ईश्वर ने सोच समझ कर बनाया है । उसकी हमें जरूरत है। वक्त के साथ , अपनी समझ के साथ उसकी उपयोगिता तुझे समझ में आती रहेगी।

तेरा सब के सामने सच को accept करना, तेरा उत्स्फूर्त बोलना तुझे लोगों से अलग बनाते हैं । मुझे याद है जब तू गांधी जी के उपर एक compitition में भाषण दे रही थी तो तूने सबके सामने कह दिया था की “जो हस्त लिखित निबंध मैंने सबमिट किया था वो मैंने मेरे पिताजी से लिखवाया है कारण मेरे हाथ में चोट लगी थी।” सत्य के पुरस्कर्ता गांधीजी के उपर बोलते वक़्त झूट का सहारा तुझे मंजूर नहीं था।

एक और क़िस्सा मुझे आज भी याद है जब रोटरी क्लब में हम तीनों को तनय के “डांस प्लस सीजन २” के जीतने के बाद का अनुभव कथन के लिए बुलाया था। मैं बता रहा था उस रैली के बारेमें जब तनय पहली बार ट्रॉफी लेकर जलगांव आया था। रास्ते के दोनों तरफ़ हज़ारों लोग खड़े तनय से हाथ मिलाना, उसे गले लगाना चाह रहे थे। तनय को देख कर ख़ुश हो रहे थे। तो मैं बता रहा था कि लोगों के चेहरे की वो ख़ुशी देख कर लगा जैसे धन्य हो गए। ५० साल में जो कमाया उसकी क़ीमत से भी लोगों के चेहरे की हँसी , ख़ुशी की क़ीमत ज़्यादा लग रही थी।

तब तू अचानक खड़ी होकर कहती है “इसका पहला क्रेडिट मुझे जाता है “, यह सुनकर सभी श्रोता इधर उधर देखने लग जाते हैं ।तब तू हँसते हँसते कहती है “यदि मैं नहीं होती या मैं लड़का बनकर जन्म लेती तो तनय इस दुनिया में आया ही नहीं होता। मेरा जन्म हुआ इसीलिए तनय इस दुनिया में जन्म ले पाया।” सच है तन्नु…तू घरमें दूसरी गर्ल चाइल्ड थी। तेरी मम्मी को उस वक्त लड़के की चाह थी। बहुत रोई थी वो तेरे जन्म होने पर । पर उसे समझाया गया की ये जो लड़की है ना वही तुम्हारा ख्याल रखेगी। बुढ़ापे का सहारा बनेगी। थैंक यू तन्नू तूने बेटी का भी सुख दिया और एक बेटा भी ।

तन्नू कितना भी समझाऊ खुदको फिरभी तेरी हँसी की, तेरे रूठने की, तेरे कम पके या जले केक की, तेरे हाथ से बनी स्वादिष्ट पनीर चिल्ली की , तेरे छोटे छोटे कपड़ों की, कपड़ों को काँट कर छोटे करने की आदत की बहुत याद आएगी। हम miss करेंगे तुझे ।

याद रखना तन्नू … तुझ पर हमें ही नहीं पूरे मल्हारा परिवार को नाज़ है, तू परिवार की शान है । यही नाम अब तुझे मेहता परिवार में कमाना है , उन्हें बेटी की ख़ुशी देनी है । मुझे विश्वास है.. देखना एक दिन तुझे तेरे नए पापा “प्रवेशजी” की आँखो में मैं दिखने लगूँगा। वे भी मेरे जैसे ही एक अलग फ़ील्ड के कलाकार हैं, खुले विचारों के हैं, positive हैं । तुझे तेरी नई माँ “प्रतिभाजी “ में भी डॉ नलिनी दिखेगी । वही प्यार, वही caring, वही चिंता दिखेगी, कभी कभी गलती होने पर डाँट भी मिलेगी । तेरे देवर “विशेष” में तुझे तेरा भाई तनय दिखेगा, वो भी उतनाही नटखट है जितना तनय है।

तन्नू अब तेरी ताक़त डबल हो गई है। भरोसा रख और बेधड़क बड़ी बड़ी छलाँग लगा अपने नए जीवन में । हम सबकी शुभकामनाएँ तेरे साथ सदा रहेगी।

आ- तन्नु उपर आ , स्टेज पर आज मुझे तेरे साथ पहला डांस करना है…

क्रमशः भाग २
***

है ना लाइफ इस ब्यूटीफुल और
फुल ऑफ़ emotions..!

आनंद मल्हारा,
२९ दिसंबर २०२४, जलगाँव

**