Author: anand
था तो ड्राइवर…
पर लोग उसे नेताजी बुलाया करते थे।
हम दार्जलिंग से गंगटोक टैक्सी में जा रहे थे। प्रमोद नामक ड्राइवर गाड़ी चला रहा…
इस दिवाली में सब कुछ था, प्यार था मनुहार थी पर सोफा सेट पर “आरसीबा” (भाईसाब) की कमी थी।
मैं अक्सर लक्ष्मीपूजा के दिन, लेट शाम भाईसाब को मिलने आर सी बाफना शोरूम पर…
“मेरे छाती में दर्द होता है, कल तकलीफ बढ़ गई तो आप ही संभालना।”
परसों रात बच्चों के साथ “गरबा” खेलने का प्रयास किया, थोड़ा सीखा, मज्जा आया, पर…
दुनिया गोल है..
दुनिया छोटी है!
बात कल की है। तन्वी का सुबह सुबह कॉल आता है..कहती है “पापा मैं जिनके…
“विपश्यना” एक “प्रैक्टिकल” क्लास है “राग द्वेष” से परे होने का।
अंतिम भाग ६ * अब तक इधर उधर की, विपश्यना के आजू बाजू की, मेरे…
किस्सा… मेरी “डायरी” का मेरी आसक्ति का, मोह का मेरी व्याकुलता एवम दुःख के कारण का ।
विपश्यना भाग ५ * पिछली पोस्ट में मैंने जिक्र किया था… चौथे या पांचवे दिन…
हाथ जोड़ “देह बोली” बोल कर “धम्म सेवक” देते हैं “अनुशासित” सेवा।
विपश्यना भाग ४ * इगतपुरी के धम्म सेंटर पर “सेवा” देने अनेक साधक आते हैं…
“सांस” के साथ “रोमांस” करते “नानी” याद आ गई…
भाग_ ३ * इन दस दिनों में “शुद्ध धर्म” क्या होता है, “धर्म” का मतलब…

